Friday, July 16, 2010

बरसात का मज़ा ज़िंदगी भर (barsat ka mazza jindgi bhar)

मैं फ़िलहाल २५ साल की लड़की हूँ, जब होस्टल में रह कर पढ़ती थी तब १८ साल की थी।

बात उस दिन की है जब एक दिन खूब बारिश हो रही थी और मुझे कोलेज से निकलने में देर हो गई थी। रात के ९ बज गये थे। घनघोर बारिश थी मैं पूरी तरह भीग गई थी। सलवार और कुरती मेरे बदन से चिपक गई थी। मुझे डर भी लग रहा था। बारिश से बचने के लिये एक घर के नीचे रुकी थी। ठंड से ठिठुर भी रही थी। घर में से एक औरत ने निकल कर मुझे ऊपर बुला लिया। मुझे राहत मिल गई थी। उसने मुझे कपड़े बदलने को दिये। एक कुरता दिया जिसे मैंने पहन लिया और उस औरत को धन्यवाद दिया। बारिश रुक नहीं रही थी। औरत अपने कमरे में चली गई। मैं अकेली हो गई थी। कुछ देर बाद तीन लड़के आये, मुझे देखा और अंदर चले गये। बाद में मुझे बुलाया तो मैंने देखा वो औरत उन तीनों के साथ नंगी लेटी थी। पहले मैं डर गई मगर उसने मुझे डरने से मना किया और कहा कि यदि वो इस बारिश का मज़ा लेना चाहती हो तो बोलो...

मेरी बेटी का ट्युटर (meri beti ka tutor)

मैं एक ३६ साल की शादी शुदा औरत हूँ। दिल्ली कैलाश कॉलोनी मैं हम रहते हैं। लोग मुझे गुरमीत नहीं तो सिमरन बोल के पुकारते हैं। मैं बहुत ही सेक्सी और हॉट पंजाबी औरत हूँ। जब मैं कॉलेज में थी तब सारे लड़के मेरे पीछे पागल थे। मेरे २/३ बाय्फरेंड्स भी थे। लेकिन शादी के बाद मुझे दिल्ली आना पड़ा। मेरा हज़्बेंड बहुत ही बिज़ी टाइप के आदमी हैं। अपनी खूबसूरत और सेक्सी बीबी से उसको अपना बिज़्नेस ज़्यादा पसंद है। हफ्ते में मुश्किल से २ बार हम बिस्तर पे मिलते थे। मेरी एक १२ साल की लड़की हैं। नाम हैं रिया। वो जब क्लास सेवेन पहुँची तो हम ने उसकी पढ़ाई के लिए एक हाउस टूटर रखने को ठान ली। मैने अपने सहेलियो से पूछा तो उन्हो ने रवि नाम के एक ब्रिलियेंट टूटर का नंबर दिया।

मैने शाम को उसे फोन किया: हेलो, नमस्ते.. क्या मैं रवि से बात कर सकती हूं?'

'हाँ जी , कहिए'

जी मैं सिमरन बोल रही हूँ, कैलाश कोलोनी से, मुझे आपकी ज़रूरत है''

''जी?? मैं समझा नही''

रिहर्सल में हिरोइन को चोदा (reharsal me heroine ko choda)

हैलो रीडर्स, आई एम रोहित बैक वंस अगैन

आई एम २४ इयर्स ओल्ड एंड विद ए गुड फिज़िक & गुड मशीन साइज़। बात तब की है जब मैं कॉलेज में था एमए फ़ाइनल कर रहा था और कॉलेज में फेस्ट चल रहा था। निधि मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी और मैं उसे दिल ही दिल में चाहता भी बहुत था लेकिन कभी कहने की हिम्मत नहीं होती थी। हम दोनों खूब साथ कॉलेज में रहते थे बात चीत करते थे लेकिन इससे ज़्यादा न कभी मैंने न कभी उसने ही कोई पहल करी। फेस्ट में हम दोनों एक्टर ऐक्ट्रेस का रोल कर रहे थे। नाटक शाम को ५ बजे होना था और हम १ बजे से ही रिहर्सल कर रहे थे। लगभग २ घंटा पहले मेक अप करके हम दोनों को थोड़ी देर डाइरेक्टर ने हमें एक ही कमरे में छोड़ दिया और डाइलोग बोल कर देखने को कहा। उसने एक आदिवासी की साड़ी पहनी थी और मैंने एक धोती और एक फटा हुआ बनियान पहना हुआ था क्योंकि मैं नाटक में एक मजदूर और वो मेरी बीवी का रोल कर रही थी।

जब अंजू को पहली बार चोदा (jab-anju-ko-pahli baar-choda)

लेखक: हिमांशु, कानपुर

हेल्लो ! मेरा नाम हिमांशु है . मेरी उम्र १८ साल है , और मै कानपूर का रहने वाला हु . ये मेरी और मेरी गर्लफ्रेंड की कहानी है . उसका नाम अंजू है . उसकी भी उम्र १८ साल है . वह मेरे घर के पास में रहती है . दिखने में वह बहुत सेक्सी है . उसकी चुचियो को देखकर मेरा मन उसको एक बार छोड़ने का करता है .

एक बार मै एक हसिनाओ को छोड़ने के नियम की किताब पढ़ रहा था . पढ़ते हुए वो किताब मैंने केमिस्ट्री की किताब में रख दी . एक दिन वो मेरे पास केमिस्ट्री की किताब लेने आई . मैंने वो किताब उसे दे दी . वो किताब लेकर चली गई . जब उसने वो किताब खोली तो उसमे वो किताब निकली उस किताब के कवर पेज पर नंगी लड़की की तस्वीर छपी थी . उसने वो किताब पढ़ी . उसे बहुत मज़ा आया . अगले दिन वो उस किताब को मेरे घर वापस करने आई .

इन्टरनेट का मस्त दोस्त

लेखक: यशु अग्रवाल

हाय ! गर्ल्स ! भाभी ! आंटी ! यंग लडिस ! कॉलेज गर्ल्स !!

दोस्तों आज मैं आपको अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ . मैं अक्सर इन्टरनेट पर चाटिंग करता रहता हूँ . मैंने कई फ्रिएंड्स बनाये पर एक बार मेरे एक फ्रेंड बना जो की मेरे हे शहर का था . वो फ्रेंड एक २३ साल की शादीशुदा लेडी थी वो मुझसे बातें करने में इन्टरेस्टिड थी . हम काफ़ी टाइम तक एक दूसरे के फ्रेंड बने रहे .

फिर एक दिन उसने मुझे मिलने के लिए कहा . मैं मिलने के लिए तैयार हो गया . उस दिन बहुत तेज़ बारिश हो रही थी . मैं उनके घर पहुँचा और बेल बजाई . तो मैंने देखा के सामने एक सेक्सी फीगुर की लड़की खड़ी उसने ब्लैक कलर की शोर्ट नाईटी पहन रखी थी जिसमे से उसकी व्हाइट कलर की ब्रा साफ़ दिख रही थी उसके बूब्स तो ऐसे लग रहे थे जैसे अभी ब्रा फाड़ के बाहर निकल जायेंगे . मैंने अपना नाम बताया और अन्दर आ गया . मैं तेज़ बारिश के कारण बिल्कुल भीग चुका था . मेरे अंडरवियर मैं भी पानी चला गया था . मैं पहली बार किसी अजनबी लेडी के घर गया था इसलिए थोड़ा घबरा रहा था .

रानी के साथ मज़ा (rani-ke-sath-mazza)

यह स्टोरी १ महीने पुरानी है।

हाय फ़्रेंड्स आई एम नील फ़्रोम भोपाल। आप लोगों ने "मेरी कहानी चाची से प्यारा कौन" पढ़ी। काफ़ी अच्छा रिस्पोंस आया अच्छा लगा। अब मैं आप लोगों को एक नयी कहानी बताने जा रहा हूँ। अब हम लोग भोपाल में ही शिफ़्ट हो गये थे। जैसा कि आप लोगों को मालुम है कि चाची को चोद कर मुझे चोदने का शौक लग गया था तो लंड चोदने के लिये तड़पता रहता है। हमारे घर में पार्ट-टाइम नौकरानियां काम करती हैं। लेकिन कोई भी सुंदर नहीं थी। मम्मी बड़ी होशियार थीं। सब काली कलूटी और भद्दी भद्दी चुन चुन कर रखती थीं। जानती थी लड़का बहुत ही चालु है। आखिर में जब कोई नहीं मिलि तो एक को रखना ही पड़ा - जो कि १९ -२० साल की मस्त जवान कुंवारी लड़की थी। साँवला रंग था और क्या जवान, सुंदर ऐसी कि देख कर ही लंड खड़ा हो जाए। मम्मे ऐसे गोल गोल और निकलते हुए कि ब्लाउज़ में समाए ही नहीं। बस मैं मौके की तलाश में था क्योंकि चोदने के लिये एकदम मस्त चीज़ थी। सोच सोच कर मैंने कई बार मुठ मारा। बहुत ज़ोर से तमन्ना थी कब मौका मिले और कब मैं इसकी बुर में अपना लंड घुसा दूं। वो भी पैनी निगाहों से मुझे देखती रहती थी। और मैं उसके बदन को चोरी चोरी से नापता रहता था। मन ही मन में कई बार उसे नंगा कर दिया। उसकी गुलाबी चूत को कई बार सोच सोच कर मेरा लंड गीला हो जाता था और खड़ा होकर फड़फड़ा रहा होता। हाथ मचलते रहते कब उसकी गोल गोल चूचियों को दबाऊं। एक बार चाय लेते समय जब मैंने उसे छुआ तो मानो करेंट सा लग गया और वो शरमाते हुए खिलखिला पड़ी और भाग गयी। मैंने कहा मौका आने दे, रानी तुझे तो खूब चोदुंगा। लंड तेरी चिकनी बुर में डाल कर भूल जाऊंगा। चूची को चूस चूस कर प्यास बुझाउंगा और दबा दबा कर मज़े लुंगा। होठों को तो खा ही जाउंगा। रानी उसका प्यारा सा नाम था।

एक नेट फ़्रेन्ड की मस्त चुदाई- सच्ची कहानी (net-friend-ki-mast-chudai-ek sachchi-kahani)

हाय फ्रेंड्स स्टोरी पढने वाली चूत और लोडों को मेरे लंड का सलाम . आपने आज तक बहुत सी स्टोरीस पढ़ी होंगी मैं भी आज अपनी एक सची स्टोरी इस साईट पे डालना चाहता हु ..मै राहुल हरियाणा से .

ये बात अभी कुछ ही समय पहले की है मुझे नेट पे एक लड़की मिली जिसका नाम था शमा और उसकी मुझसे डेली बात होने लगी ...धीरे धीरे हम बहुत घुलमिल गए .और हम एक दुसरे को पसंद करने लगे बस मेरा भगवन ने मुझे एक आर्ट अछी दी है किसी को भी बहुत जल्दी इम्प्रेस कर लेता हु . तोह धीरे धीरे हमने एक दुसरे के मोबाइल नम्बर . एक्सचेंज करे और अब हम फ़ोन पे बात करने लगे

और एक दिन हमने मिलने का प्रोग्राम बनाया और एक प्लेस डिसाइड किया और हम मिले ..उस दिन हमने कुछ बातें करे ..वो बहुत सुंदर थी उसका फिगर था ३४ -३० -३६ .....और वो एक मुस्लिम लड़की थी क्या माल थी यार ..मेरी तो बस एक ही तमन्ना थी की किसी तरह उसकी चुदाई का मौका मिले ..उसके बूब्स और उसकी गांड क्या माल थे यार जब वो चलती तो कयामत ढाती थी ..अब हमने एक दूसरे को देख भी लिया था तो अब हमारी बातें कुछ बढ़ने लगी ..अब हम एक दूसरे से सेक्स की बातें करने लगे.

दो बहनों की सेक्सी चुदाई ( do bahno ki sexy chudai )

मेरा नाम अमित है. मैं मुंबई में रहता हूँ. मैं आज से एक साल पहले मुंबई आया था. मैने जहा पर रूम किराये पर लिया था वहा एक आंटी भी रहती थी. मेरी आंटी से दोस्ती हूँ गई. आंटी की दो लडकियां थी. एक का नाम सुनैना और एक का नाम शम्मी था. दोनों बहुत सेक्सी थी. एक थोडी मोटी थी जिसका नाम सुनैना था. बड़ी वाली एकदम सेक्सी और स्लिम थी. दोनों चोदने वाली चीजे थी. दोनों दूध की तरह गोरी थी. मैं रात दिन उनकू चोदने के बारे मैं सोचता रहता. कई बार मैं उनकू याद करके नगन करके ख्यालू मैं चोदता रहता था. उनकू याद करके मैं दिन मैं एक बार मुठ जरूर मरता था

एक दिन मेरी किस्मत खुल गई. मैने शम्मी को उसके बॉय फ्रेंड के साथ गार्डन मैं फ्रेंच किस करते देख लिया. मैं वही पर उनका पीछा करते रहा. मैने मोबाइल से उनके फोटो भी ले लिए. शाम को जब वो घर वापिस आ रही थी तू मैने उसको रास्ते मैं रूक लिया. मैने उसे कहा पैदल जा रही हो आओ बाईक पे घर छोड़ दू पहले तो वो मन करती रही पर जोर डालने पर वो मान गई. मैने उसे बिठा लिया. रास्ते मैं मैने पूछा गार्डन मैं क्या कर रही थी. वो घबरा गई और कहने लगी कुछ नही. मैने कहा ज्यादा बनो मत मेरे पास तुम्हारे फोटो हैं. वो डर गई और मान गई. वो मेरी मिन्नतें करने लगी की घर पर मत बताना. मैने कहा एक शर्त पर नही बताऊंगा अगर तुम मेरे से चुदवाओगी. उसने कहा यह नही हो सकता. मैने कहा तो मैं बता दूंगा. वो मान गई और मुझे अपना मोबाइल नम्बर दिया और कहने लगी कल जहा कहोगे आ जाऊगी.

चुदाई या छुपन-छुपाई (chudai ya chhupan chhupai)

मैं करन हिमाचल क रहने वाला हूं। यह बात की है जब मैं ग्याहर्वीं में पढता था। मैं अपने मामा के यहां पेपर देने गया था। वहां पड़ोस में एक लड़की सुन्दर सी, मस्त फ़िगर वाली रहती थी। नाम था हनी। वो मुझ पर पहले दिन से ही लाइन मारने लगी थी पर मैनें ज्यादा धयान नहीं दिया

एक दो दिन में वो मुझ से बात भी करने लगी और हम लोग एक दूसरे को इशारे भी करने लगे। एक दिन जब मामा काम पे गये थे और मामी बच्चों के साथ पड़ोस में गयी थी तो वो बाहर छोटे बच्चों के साथ खेल रही थी। मैने बड़ी हिम्मत कर के उसे इशारा किया और अपने पास बुलाया मगर उसने आने से मना कर दिया।

उस दिन के बाद मैनें सोच लिया कि कुछ ना कुछ तो जरुर करुंगा उसे पाने के लिये। मेरे मामा शाम को ७ । ३० बजे वापिस आते थे। उस के थोड़ी देर बाद जब थोड़ा स अन्धेरा हो गया तो सब बच्चे घर चले गये और उस ने मुझे इशारा कर के मुझे बुलाया, मै उसके पास गया मगर पड़ोस की एक औरत वहां आ गयी और उससे बात करने लगी। मै बात बिना किये ही आगे चला गया।

चाची की चूत की वासना-१ (chachi ki chut ki vaasna-1)

लेखक: मनीश मलिक

यह जो स्टोरी लिखने जा रहा हूँ वो कल की ही बात है। मेरे एक आंटी है उसकी स्टोरी है। मुझे आंटी बहुत अच्छी लगती थी। क्या माल था। उसकी फ़ीगर ३८-३०-३८ थी

बड़े २ चूतड़ और इतनी सेक्सी गाँड थी कि मेरा लंड उसको देख कर टाइट हो जाता था। गाँड का पूछो मत मोटी मोटी गाँड जब जब वो चलती थी तो गाँड हिलती रहती। जब जब मैंने आंटी की गाँड देखा करता था मेरा लंड जोश में आ जता। आंटी बहुत ही सेक्सी थी। बेचारी आंटी अंकल के लंड से खुश नही थी ।

एक दिन मैं उनके घर गया मीनु आंटी अकेली थी। मैंने आंटी से पूछा कि सब लोग कहाँ है आंटी ने जवाब दिया की अंकल का तो तुमको पता ही है और सभी बच्चे मामा के घर गये हैं, आज रात को नहीं आयेंगे। फिर मैंने आंटी को कहा कि ओके आंटी, मैं चलता हूँ। आंटी ने मुझे रोक लिया और कहा अभी रुक जाओ मुझे नहाना है, तब तक तुम मेरे घर का ख्याल रखना, मैं अभी नहा कर आती हूँ। आंटी नाइटी में थी, पिंक नाइटी में उनके बूब्स बड़े सेक्सी लग रहे थे। मैं रुक गया आंटी नहाने चली गयी।

साइबर कैफे में लड़की की चुदाई (cyber cafe me ladki ki chudaai)

लेखक: रोनित, राजकोट

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम रोनित हे मैं राजकोट का रहेने वाला हू मैं उम्र २३ साल है और में एक अच्छा खासा दिखता हू मेरा रंग भी गोरा हे चलो ये बात तो मेरी पहचान की थी अब में आपको मेरी पहली मगर सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हू मैं राजकोट में अपना एक साइबर कैफे चलाता हू वह पे काफ़ी सारी लड़कियों का आना जाना रहता हे मगर में एक बहुत शर्मीले टाइप का बंदा हु

मुझे याद हे ये पिछले साल की बात हे शाम के ७:३० बजे होंगे तब में कैफे पर अकेला था और एक सुंदर सी लड़की आई उसने अपना नाम कृपा बताया था वो मेरे सामने के कंप्यूटर पर बेठी थी वो बाला की खुबसूरत लग रही थी उसने शोर्ट शर्ट और लो वेस्ट जींस पहनी थी दोस्तों उसका क्या फिगर था ३६ २६ ३६ एकदम उभरे हुए निप्पल थे उसके उसने मुझे कोप्म्पुटर ख़राब होने का बहाना बना के अपने पास बुलाया मैं ने जाके चेक किया तो बिल्कुल सही चल रहा था मगर उसने मुझे कहा की उसे ठीक से कंप्यूटर आता नही हे तो में उसको थोड़ा सा सिखा दू मैने कहा ठीक हे

मैरिड गर्ल फ़्रेन्ड (married girlfriend)

प्रेषक : हर्षिल

हाय फ्रेंड्स

मैंने बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं . इस लिए मै भी अपनी एक सच्ची कहानी भेज रहा हूँ .

मेरा नाम हर्ष है मै अहमदाबाद में रहता हूँ . मेरी एक फ्रेंड थी उसका नाम भूरी था . वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी . हम बचपन से साथ पढ़ रहे थे . उसका और मेरा कभी क्लोज़ फ्रेंडशिप था . और हमारे घर के पास एक दूसरा लड़का है जिसका नाम विनोद था . वो उसको भी जानती थी . विनोद ने उसे प्रोपोस किया . जब मै क्लास १२ वी में था तभी की ये बात है . तब वो मेरे पास आई और विनोद के बारे में पूछने लगी की वो कैसा लड़का है तब मैंने बोला बिल्कुल सही लड़का है . तभी विनोद भी मेरे पास आया और कहने लगा की तेरा और उसका (भूरी ) का कोई चक्कर तो नही . तभी मैंने बोला हम दोनों सिर्फ़ क्लोज़ फ्रेंड है . अब दोनों की (भूरी और विनोद ) का लव शिप चालू हुआ . और उन्होंने मैरिज़ कर लिया . तभी मै भी उनके घर गया पर मेरे मन में कोई बुरा ख्याल नही आता था .

फ़्रेन्ड से गर्ल फ़्रेन्ड बन गयी वो उस दिन (friend se girl friend ban gayii us din)

प्रेषक: रोहित मस्त

सभी फड़कती चूतों को सलाम! पिछली स्टोरी के लिए आपके ढेर सारे मिल्स आए उनके लिए आप सब का बहुत बहुत थंक्स यार और ये स्टोरी पढ़ कर भी रेपली ज़रूर करना.. और अब ज़्यादा भूमिका बनाये बिना सीधा सीधा कहानी शुरू करता हूँ.

हुआ यूँ की वो मेरे ऑफिस में मेरे कलीग थी और मेरी अच्छी फ्रेंड थी मगर हमने उस नज़र से कभी एक दुसरे के बारे में नही सोचा था. उसका नाम निशा और फिगर ३६-२८-३६ का था. बोले तो एक दम मस्त. ऊपर से उसका गोरा और एक दम कसा हुआ बदन. बस देखते ही कोई भी पागल हो जाए. उस दिन मैंने उसे काफी परेशान देखा तो पूछा यार क्या प्रॉब्लम है? तो उसने बताया कि वो मोंठ में पहले ही ३ लीव ले चुकी है और अब उसे उसकी कज़न सिस्टर कि शादी में जाना है जयपुर और बस से अगर जायेगी भी तो एक दिन में वापिस नही आ सकती और एच आर बोल रहा है कि एक दिन से ज़्यादा छुट्टी बर्दाश्त नही होगी. मैंने तुंरत उसे बोला कि टेंशन काहे कि यार मैं तुम्हें दिल्ली से जयपुर बाइक पर ले जाऊंगा ३ घंटे में पहुँच जायेंगे और तुम अपना काम निपटा लेना फ़िर वापिस आ जायेंगे. वो मान गई. मगर प्रॉब्लम ये थी कि वो अपने रिलेटिव्स को ये नही दिखाना चाहती थी कि वो किसी लड़के के साथ आई है इसलिए मैंने बोला कि मैं वहीं कहीं घूम लूँगा या किसी होटल में रूम ले लूँगा. वो मान गई.

जन्नत (jannat)

चार दिनों का प्यार ओ रब्बा
लम्बी चुदाई लम्बी चुदाई

रब्बाऽऽऽ

चार दिनों का प्यार ओ रब्बा
लम्बी चुदाई लम्बी चुदाई

तेरे बिन मैं चुदुं किसी से ना
तेरे बिन मारे मेरी चूत कोई ना
कितने ज़माने बाद ओ रब्बा
चोदने तू आया चोदने तू आया

लो यारो ! मैं जवान हो गया

प्रेषक : विक्रम मलहोत्रा

डियर रीडर्स!

मैं अपना परिचय देना चाहता हूँ मैं विक्रम उर्फ विक्की हूँ मेरी उम्र २६ साल है और मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हू. मेरा बॉडी फिगर अट्रॅक्टिव तो नही कह सकते पर स्मार्ट फिगर कह सकते है और मैं स्मार्ट भी हूँ और लकी भी हूँ मेरे लक (भाग्य) ने हमेशा मेरा साथ दिया. अब ज्यादा बोर ना करते हुए मैं आपसे अपनी लाइफ के कुछ एक्सपीरियेन्स आप से शेयर करूँगा. जिन्हें सच मानना है वो वैसे् पढें और जिन्हें झूट लगे वो सिर्फ़ स्टोरी का लुत्फ़ ले.

बात उन दिनो की है जब मैने हाई स्कूल पास किया और इंटर मैं एडमिशन लेने के लिए कोशिश कर रहा था हालाकि मेरे मार्क्स अच्छे थे पर मैं जिस कॉलेज मे एडमिशन लेना चाहता था उसके हिसाब से कुछ कम थे. मेरे सब दोस्त एडमिशन ले चुके थे पर मैं उसी कॉलेज मैं एडमिशन लेना चाहता था. एक दिन मैं फॉर्म सब्मिट करने की कोशिश कर रहा था……कि एक लड़की मेरे पास आई. उसने कहा, हेल्लो! “विक्की”.

मेरी कहानी पार्ट –५ (meri kahani part-5)

प्रेषक : राजेश राज

मेरे इम्तहान पास आ गए थे अब मै अपनी पढाई पर जयादा ध्यान दे रहा था ,लेकिन भाभी की याद आ ही जाती थी .उस दिन जब मै स्कूल से घर आया तो मेरी मम्मी ने बताया की अगले हफ्ते तुम्हारी मौसी की शादी में जाना है तो मैंने कहा मेरे तो एक्साम्स है मै कैसे जा सकता हूँ ? तो घर में सभी चिंतित हो गए ये सारी बाते भाभी को पता चली तो उन्होंने कहा अरे इसे मेरे घर छोड़ दीजियेगा मै इसे पढ़ा भी दिया करूंगी .

शनिवार को सब लोग जबल पुर चले गए और मै अपनी सारी किताबे ले कर भाभी के घर चला आया .मैंने और भइया ने साथ में ही नाश्ता कर लिया तो भइया ने कहा चलो मै तुम्हे स्कूल छोड़ते हुए जाऊंगा ,स्कूल से मै घर लगभग तीन बजे ही आ गया ,भाभी ने दरवाजा खोला ,भाभी ने आज सफ़ेद रंग की चूडीदार और काले रंग का कुरता पहन रखा था ,आज वो कुछ जादा ही प्रसन्न दिख रही थी ,खाना खा कर हम दोनों बेड रूम में आ गए भाभी ने छोटू को पहले से ही सुला दिया था .भाभी ने बताया की मेरे ब्रा की साइज़ बढ़ गयी है मैंने हंसते हुए कहा बंद इतनी मेहनत कर रहा है तो उसका फल भी मिलेगा .

मालिक की पत्नी को चोदा (malik ki patni ko choda)

हाय मैं शेखर आपके लिए एक स्टोरी लेकर आया हूँ मेरी उम्र २६ साल है मेरे घर में माँ एक छोटा भाई और दो बहन है मेरे पिताजी के देहांत के बाद मैंने १२वीं पास करके पढाई छोड़ दी और घर के पालन पोषण में जुट गया मेरी बहन की शादी हमने एक अच्छे खानदान में पक्की कर दी मगर उन्होंने पहले दो लाख रुपये दहेज़ माँगा था.

मैं एक छोटे से करखाने में काम करता था कारखाने का मालिक ५५ साल का बुड्डा और एक अमीर आदमी था परन्तु उसकी बीवी एक सुंदर, सु्शील, सेक्सी और बेहद खूबसूरत लड़की थी वह उसकी पत्नी नहीं बल्कि उसकी रखैल थी। वह पहले एक हाई प्रोफाइल कॉलगर्ल थी और अभी भी वह लड़कियों से जिस्मफरोशी का धंधा करवाती थी हमारे मालिक ने उसे सारी पॉवर दे रखी थी और खुद उसकी गांड के पीछे दुम हिलाता फिरता था।

मैंने उसे पटाने के बारे में सोचा क्यूंकि अगर वह पट गयी तो मुझे इस कारखाने का मैंनेजर बना देगी एक दिन वह ऊपर खड़ी देख रही थी तो मैंने उसे देखकर एक प्यारी सी स्माइल दे दी। वह भी मुझे देकर हंस पड़ी। अब रोज़ ऐसा ही चलता एक दिन जब मैं खाना खा रहा तो वह मुझे देख रही थी तो मैंने उसे दूर से ही खाने का न्योता दिया तो वह मुझे न कहकर थैंक्स करके चली गयी।

मैंने तुम्हें चोदा (maine tumhe choda)

प्रेषिका : अनामिका शंकर

हेलो जान गोट युअर मेल . अच्छी है

तुम्हे एक और सेक्सी मेल चाहिए था न ओके

मैंने तुम्हे फ़िर उसी कमरे में बुलाया. तुम जैसे ही रूम मे आयी, मैने दरवाजा बन्द कर लिया और तुम्हे किस करने लगा। फ़िर मै बेड पे बैठा और तुमसे कहा " तुम इस तरह मेरी बाहों में बैठो कि तुम्हारा गोरा बदन पूरी तरह मेरी बाहों में आ जाये" और तुमने अपनी दोनो टांगें खोल के चौड़ी की औए सीधे मेरे लन्ड पे आ के बैठ गयी. मैं तुम्हे किस करने लगा और तुम्हारे दूध दबाने लगा. कुछ देर बाद मैने तुम्हे अपनी जांघ पे मेरी तरफ़ मुंह करके बैठाया और फ़िर तुम्हे किस करने लगा। फ़िर मैने तुम्हे नंगी कर दिया। उसके बाद तुमने मेरे भी कपडे उतार दिये.

चोदो ना मुझे (chodo na mujhe)

प्रेषिका : अनामिका शंकर

हाट विक्रम : सुनो
हाट विक्रम : कजन ब्रदर का रोल
हाट विक्रम : यार
मैं : हाँ बोलो
मैं : ठीक है
मैं : तुम बोलो
हाट विक्रम : चलो स्टार्ट करो
हाट विक्रम : तुम पहेले
मैं : मुझे शर्म आती है
हाट विक्रम : यहाँ कैसी शर्म यार
हाट विक्रम : स्टार्ट करो
हाट विक्रम : चलो
मैं : अच्छा
मैं : मैं नहा रही थी
हाट विक्रम : फिर
मैं : टॉवेल ले जाना भूल गई थी
हाट विक्रम : फिर
मैं : नहाने के बाद
मैं : मैंने टॉवेल के लिए आवाज़ लगायी
हाट विक्रम : बोलो

थैंक यू कृति फॉर दैट नाईट (thank you kriti for that night)

प्रेषक : ॠषि शर्मा

हाय ... मेरा नाम ऋषि है...और आप सबो की फड़कती चूतों और भटकते लंडों को मेरे लौडे का सलाम..

मैं एक सॉफ्टवेर इंजिनियर हूँ और बंगलोर में जॉब कर रहा हूँ.

मै बहुत गोरा हूँ और लोग कहते हैं कि मै बहुत ही स्मार्ट और डैशिंग हूँ, और शायद इसी वज़ह से मै कॉलेज में बहुत सारी लड़कियों का कृश भी था.. मेरी हाईट ज्यादा नही है बस ५' ५'' ही है पर मेरी कुछ फ्रेंड कहती है की अगर मेरी हाईट थोडी और होती तो मै अच्छे अच्छो की छुटी कर देता.. खैर ये सब छोड़ कर मै कहानी पर आता हूँ.

बात उस समय की है जब मै कॉलेज में फिनल इयर का था (आज से लगभग ६ महीने पहले ) और उस समय मेरे फाइनल इयर प्रोजेक्ट का काम चल रहा था। कम्प्यूटर साइंस का स्टुडेंट होने क वजह से प्रोजेक्ट क लिए मुझे इन्टरनेट पे काफी समय बिताना पड़ता था. चूंकि कंप्यूटर मेरे फ्लैट पर ही थी इसलिए बोर होने पर मै चैटिंग करता था. एक बार मुझे चैटिंग करते समय एक लड़की मिली। उसने अपना नाम कृति बताया. वो वस्तुतः गुजरात की रहने वाली थी पर फिलहाल मुंबई में पढ़ रही थी. धीरे धीरे हमारी अच्छी दोस्ती हो गई. बाद में उस से फ़ोन पर बातें भी होने लगी.. हम लोग आपस में हर तरह की बातें करने लगे थे पर मैंने कभी लिमिट क्रॉस करने की कोशिश नही की.

रजनी भाभी की जल्दी जल्दी चुदाई (rajni bhabhi ki jaldi jaldi chudai)

प्रेषक : धर्मेंद्र महापात्र

हाय दोस्तो एवम दूसरों की खूबसूरत बीवियों!

मैं राज जगदलपुर, बस्तर, छत्तीसगढ का रहने वाला हूं। मैं कुछ माह से या कहें कि साल भर से शहर में नहीं हूं, इसलिये मैं अपने साथ बीते कुछ हसीन पल आप लोगों के समक्ष नहीं रख पा रहा था। मगर इस बीच मैंने दूसरे शहर में खूब मज़ा लिया। हर दूसरे तीसरे दिन कोई ना कोई नया माल मिल जाता था, जिसकी मैं जम कर चुदाई करता था।

मगर मेरे शहर में जो भाभी मेरे लन्ड का सपना देख रही थी, उससे मैं वाकिफ़ नहीं था। आज से १७ दिन पूर्व में ९ माह १० दिन तथा १२ घण्टे पूरे कर जब मैं जगदलपुर अपने घर पहुंचा तो मेरे पड़ोस में रहने वाली रजनी भाभी मुझे देख कर मुस्कुराने लगी। मैं भी उनकी खुशी के लिये थोड़ा मुस्कुराया।

मम्मी-बेटी (mammi beti)

मैं चाह कर भी उसे नज़र अंदाज़ नहीं कर सकता था। मैं उसके नग्न बदन को देखता रहा जब वो मेरे साथ शॉवर में नहाने के लिये आ रही थी। उसके कोमल हाथ मेरे शरीर पर साबुन लगा रहे थे और वो अपने कोमल हाथों से मेरे लौड़े को धो रही थी और उससे खेल रही थी। उसके चूचक तने हुए थे और मेरा लौड़ा भी धीरे धीरे खड़ा हो रहा था।

मैं आपको बता दूं कि मैं उसकी मम्मी को कई महीनों से चोद रहा हूं और वो हमेशा मुझे झीने झीने पायजामे, बिना ब्रा के छोटे छोटे ब्लाउज और टोप पहन कर चिड़ाती और उकसाती रहती है और छोटी छोटी निकरें, जिन में से उसकी छोटी छोटी पैन्टियां झांकती रहती हैं, पहन कर अपनी टांगें फ़ैला कर जांघे दिखाती फ़िरती थी मेरे चारों तरफ़, मुझे लुभाने के लिये। मैं यह सब देखता रहता था पर यह खयाल रखना पड़ता था कि उसकी मम्मी आस पास ना हो। लेकिन आज मैं अपने घर पे अकेला हूं और निश्चिंत हो कर खुले बाथरूम में आ गया, मुझे पता ही नहीं चला कि कब वो आ गयी और अब मैं उसके ३४ सी आकार के कसे Ô Ô स्तन और कतरे हुए योनि रोम देख रहा हूं। मेरे शरीर पर साबुन लगाते हुए उसने कहा कि आज सुबह ही उसने अपनी मम्मी को मुझसे चुदने की आवाजें सुनी हैं और अब वो भी मुझसे चुद कर मस्ती करना चाहती है। उसने कहा कि मेरे लिये चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि वो कुंवारी नहीं है। मैं अच्छी तरह समझ सकता हूं कि वो कुंवारी नहीं हो सकती, लेकिन मुझे डर है कि वो केवल १८ साल की हुई है और उसे बहुत कुछ सीखना होगा।

बायोलोजी की टीचर के साथ सेक्सोलोजी (biology ki teacher ke saath sexology)

प्रेषक : साम

मेरा नाम साम है। मेरी उमर अभी 42 है। मैं स्कूल के दिनों से ही चोदने का बड़ा शौकीन हूं।

लेकिन कभी मौका नहीं मिला तो मैं हाथों और किताबों से ही काम चला लेता था। बहुत बार लड़कियों को पटाने की कोशिश की लेकिन सफ़ल नहीं हो पाया। सैंयां की जगह भैया बोल के दिल दुखा देती।

खैर ऊपर वाले के घर देर है लेकिन अंधेर नही है. मेरी जिंदगी में भी उजाले की किरण फूटी जब मैं ११वी कक्षा में था. मैं सायंस में था. हमारी बायोलोजी की टीचर स्कूल में नई आई थी, उनका नाम अमिता था. उस समय वो २३ साल की थी. बहुत सुंदर थी, उसका फिगर ३६-२६-३६, ऊंचाई ५'६", वो बहुत सेक्सी थी, सब टीचर उसके आगे पीछे घूमते थे लेकिन किसीके भाव नही देती थी.

क्लास में वो हमेशा मेरे काम से खुश रहती थी और कई बार मेरी तारीफ भी करती थी। लेकिन मेरे दिमाग में एक ही बात आती थी कब मुझे ऐसी लड़की चोदने को मिलेगी. और एक दिन मौका मिल ही गया.....

गांव की भाभी (gaon ki bhabhi)

प्रेषक : राहुल गुप्ता

हेलो दोस्तो ! मेरा नाम सुमित है और मैं दिल्ली में एक जगह घोन्डा में रहता हूं मैं २० साल का हूं मेरा लन्ड भी लोहे की राड की तरह खड़ा होता है

तो दोस्तों मैं सुनाता हूं आपको अपनी सच्ची कहानी। बात उन दिनों की है जब मैं १२ क्लास पास करके छुट्टियों में गांव गया था जहां मेरे चाची चाचा रहते है तो मैं पहुंच गया चाची के घर।

४ -५ दिन तक तो मैं ठीक ठाक ही रहा। एक दिन मैं शाम को सड़क पर घूम रहा था तभी मुझे एक औरत दिखी। वो बहुत खूबसूरत थी। वो हमारे घर की तरफ़ ही जा रही थी। तभी मैं उसका पीछा करने लगा। और उसके घर पहुंचा तो चाची उनके घर पे बैठी थी। उन्होंने मुझे देखा और मुझे बुला लिया और मेरा परिचय उन लोगों से कराने लगी तो मुझे पता चला कि वो हमारी दूर की भाभी लगती है। उसी दिन से मेरा उनके घर आना जाना शुरू हो गया। बस यों समझिए कि सारा दिन उनके यहां ही गुजरता था्।

स्टूडेन्ट की चूत मारी (student ki choot mari)

प्रेषक : विशाल

हाय ! मेरा नाम विजय है। मैं २२ साल ५'८ " का लड़का हूं। मेरे उसका साईज़ ७" है। आज मैं आपको अपनी एक ट्यूशन वाली स्टूडेन्ट की चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूं। मैं कंप्यूटर साइंस स्टुडेंट हूँ ,मैं पार्ट टाइम के लिए टूशन पढाता हूँ . २ साल पहले की बात है उस समय मेरी एक स्टुडेंट थी प्रिया, साली बहुत सेक्सी थी, कहने को १०वी में थी मगर बूब्स का साइज़ देख कर लगता था कि पूरी जवान है ,चलती थी तो कयामत ढा देती थी ,वैसे ये बात मेरे दोस्त बोलते थे मैंने उसे ऐसी नज़र से कभी नहीं देखा था

एक दिन उसे मैथ्स में प्रॉब्लम आ गया ,बेचारी ने सारी रात सोल्व करने कि कोशिश कि मगर झांट सोल्व नहीं कर पाई , उसने दूसरे दिन मुझसे वोह प्रॉब्लम पूछा मैंने एक ही बार में सोल्व कर दिया वोह पूरी इम्प्रेस हो गई ,उसको हाव भाव बदलने लगे ,वैसे मैं अपने स्टूडेंट्स से क्लो्ज रहता हूँ पर वोह कुछ ज्यादा ही क्लोज हो रही थी.

सुमित की शादी का सफर (sumit-ki-shadi-ka-safar)

प्रेषक : देव मुकन्द

सभी दोस्तों को मेरा सादर प्रणाम और प्यारी भाभियों और कुंवारी !! चूत वालियों को मेरे लंड का प्रणाम. मैं आपको अपने जीवन की रास लीला सुनाने जा रहा हूँ । दोस्तों मैं देव इंडिया के दिल मध्य प्रदेश के सागर का रहने वाला हूँ. मेरी उमर ३८ साल रंग गोरा मजबूत कद-काठी और ६"४" लम्बा हूँ. मुझे मजलूम की मदद करने मैं बड़ी राहत मिलती है और नर्म दिल हूँ।

जैसा की अक्सर कहानियो में होता है कि कहानी का कैरेक्टर के ऑफिस की दोस्त या पड़ोसन या रिश्तेदार वाली कोई बुर (जिसको मैं प्यार से मुनिया कहता हूँ ) मिल जाती है उसे तुरन्त चोदने लगता है, पर हकीकत इससे कही अधिक जुदा और कड़वी होती है एक चूत चोदने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है ऐसी एक कोशिश की यह कहानी है।

जान! हाउ आर यू (dosti jan how are you)

प्रेषिका : अनामिका शंकर

तुम्हारी सेक्सी मेल्स पढ़कर मुझे इतना मज़ा आता है कि मैं बता नहीं सकती . जितना मज़ा तुम्हारी मेल ने दिया है उतना शायद ही कभी मुझे मिला हो . जैसा की तुम मुझे कह रहे थे , मैं भी तुमको यह सेक्सी मेल लिख रही हूँ . होप यू एन्जॉय .

जहाँ तुमने छोड़ा था उसके आगे से लिख रही हूँ. तुम मेरे पास आगरा आए थे और होटल के रूम में बुला कर तुमने मुझे खूब चोदा .

(हाय मैं इतना गन्दा सोच रही हूँ )

तीन बार करने के बाद , तुम पूरी तरह निढाल होकर मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मेरे ऊपर ही सो गए . सुबह उठकर तुम वापिस चले गए

एक वीक बाद तुम वापिस आए इस एक वीक में मैं तुम्हारी याद में हस्त मैथुन करती रही .

तुम सुबह १० बजे मेरे रूम पे आए . तुमने दरवाज़ा खटखटाया किया . मैं सन्डे होने के कारण थोडी देर पहले ही सो के उठी थी . मैंने जैसे ही दरवाज़ा खोला तुम अन्दर आ गए , पीछे से दरवाज़ा बंद करके मुझे अपनी बाहों में भर लिया और बेतहाशा किस करने लगे.

तुमने कहा " मैं पूरे एक हफ्ते से प्यासा था आज मेरी प्यास बुझा दो ".

मैंने मजाक में कहा लो पानी पी लो फिर कोल्ड ड्रिंक भी देती हूँ .

तुमने हँसते हुए पानी पी लिया और कहा कोल्ड ड्रिंक मैं गिलास से नहीं पियूँगा

मैंने पूछा " फ़िर कैसे ". तुम आगे आकर मुझे किस किया और मेरे मम्मो को दबाते हुए बोले कि नए स्टाइल में पियूँगा !!!!!!!!!!!!!!.

मैंने पूछा कौन सा नया स्टाइल . तुमने कहा अभी बताता हूँ .

मैंने क्रीम कलर कि नाईटी पहनी थी नीचे ब्लैक ब्रा और पैंटी

"तुम बैठो मैं अभी नहा के आती हूँ "

तुम : " चलो मैं तुम्हें नेहलाता हूँ "

रेशमा दि सेलगर्ल ! (reshma the sales girl)

एक पुरानी कहानी

एक बहुत पुराने गाने कि तलाश थी मुझे। इसे मुकेश और लता ने गाया था। फ़िल्म का नाम मुझे याद नहीं था। सिर्फ़ गाने के बोल ही याद थे। कुछ इस तरह था वो गाना---छोड़ गये बालम, मिझे हय अकेला छोड़ गये। सीडी, कैसेटों की दुकानों मे काफ़ी ढूंढा, पर नहीं मिला। किसी ने कहा कि शायद लैमिन्ग्टन रोड पर मिल जाये।

मै लैमिन्ग्टन रोड गया। इत्त्फ़ाक से पहली ही दुकान से यह गाना मिल गया, पर वहां क्या हुआ, ये बताता हूं।

मैने दुकान मे देखा कि कैश काउन्टर पर एक आदमी को छोड़ कर बाकी सब लड़कियां हैं। मैं सीडी के काउन्टर पर गया तो लड़की ने मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया और बोली-यस सर ! वट कैन आई डू फ़ोर यू?

ये मेरी बुरी आदत है कि जब भी मै किसी लड़की को देखता हूं तो न चाहते हुए भी मेरी नज़र सबसे पहले उसकी छाती पर पड़ती है। यहां भी ऐसा ही हुआ---मेरी नज़र उसके बूब्स पर पड़ी पर मै सम्भल गया। उसने भी मेरी इस हरकत को भाम्प लिया और अपने दुपटटे से दिलकश कबूतरों को ढकते हुए फ़िर बोली-कैन आई हेल्प यू?

जी तो चाहा कि कह दूं- इन कबूतरों को पालना चाहता हूं, लेकिन कहा- जी, मै एक बहुत पुराना गाना तलाश रहा हूं, अगर यहां मिल जाये? वो झट से बोली-गाने के बोल बताइये।

---छोड़ गये बालम, मुझे हय अकेला छोड़ गये---

मेरी यादगार सुहागरात (meri yaadghaar suhaagraat)

प्रेषक : उस्ताद जी

ये मेरी अपनी आपबीती है, ये कोई कहानी नही है और इसमे कुछ ऐसा भी नही है जो मैंने कल्पना से लिखा हो.

बचपन में जब मैं पांच साल का था तब मेरी ताईजी का देहांत होने के कारण उनकी लड़की जो मुझसे सात साल बड़ी हैं हमारे साथ रहती थी. उनका नाम मंजू है. मेरे पिताजी सरकारी ऑफिस में अच्छी पोस्ट पर काम करते थे. हमें सरकारी मकान मिला हुआ था. मकान बहुत बड़ा था और उसके कमरे भी बहुत बड़े थे. चार बैडरूम, रसोई और बैठक थे उस मकान में. जबकि उस समय मैं नीरज, मेरा छोटा भाई छोटा और छोटी बहिन मुन्नी, मां, बाबूजी और मंजू जीजी कुल छः लोग ही उस मकान में रहते थे.

जैसे जैसे बड़ा हुआ एक्सरसाइज़ ठीक होने से लंड का साइज़ भी सात इंच का हो गया. पिताजी का तबादला राजस्थान के अलग अलग शहरों में होता हुआ जयपुर में कुछ समय रुका तो पिताजी ने यहाँ घर बनवा लिया. अब स्कूल में उसके बाद लड़को के कोलेज में पढ़ा लेकिन लड़कियों से बात करने में गांड फटती थी इसलिए हमारी गली में आठ लड़कियां होते हुए भी खूब इच्छा होने पर भी मैं उनमे से एक को भी पटा नही पाया. इच्छा बहुत होती थी चोदने कि लेकिन मुट्ठ मारकर ही काम चलाना पड़ता था. साइंस का छात्र था इसलिए पढ़ा सबकुछ लेकिन प्रैक्टिकल हो नही पाया. बाईस साल का होने पर मेरा कद छः फुट आ गया रंग साफ़ और चेहरा आकर्षक.

कुंवारी छोकरी

मो.शाहिद आलम

हेल्लो रीडर्स

मेरा नाम मो.शाहिद है| मैं गया (बिहार) का रहने वाला हूँ| मैं अभी २० साल का हूँ| मैं इस नेट पर लगभग सारी कहानियाँ पढ़ चुका हूँ| मुझे यह सारी कहानियाँ बहुत अच्छी लगी| ये सब पढने के बाद मुझे मेरी कहानी लिखने का मन किया सो मैं लिख रहा हूँ| यह कहानी मेरी और मेरी गर्ल फ़्रेन्ड की है| जब हम पढ़ते थे|

हम सभी दोस्त वर्ग १० में प्रवेश किए थे| रानी उसी साल हमारे वर्ग में नई-नई आई थी| मैं सीधा-साधा सा लड़का था| पर पढने-लिखने में अपने वर्ग में सबसे तेज था| रानी भी पढ़ाई के मामले में बहुत अच्छी थी| जल्द ही हम दोनो में दोस्ती हो गई|

अब मैंने उसे अलग नजरो से देखना शुरू कर दिया था| शायद वह मेरी नजरो की भाषा समझ रही थी| हम दोनो एक दूसरे से मिलने जुलने लगे थे| वह जवानी के दहलीज पर कदम रख चुकी थी| जब भी मैं उसके उभरे संतरे जैसे चुचियों को देखता था तो मेरे मन में एक ही ख्याल आता था कि अभी जाकर उनका सारा रस निकालकर पी जाऊं| स्कर्ट पहने हुए उसके कमर एवं जांघो को देखकर मुंह में पानी आ जाता था| वह कभी भी अपने होंठो पर लिपस्टिक नही लगाती थी| फिर भी उसके होंठ गुलाबी लगते थे| हर वक्त उसके होंठो को चूसने का दिल करता था|

गर्ल्स हॉस्टल में रैगिंग

कामिनी सक्सेना

मैं जब हॉस्टल में आई तो मैंने देखा वहां पर रूम बड़े अच्छे और सभी सामान के साथ थे. एम ए की पढाई करने वालों के लिए सिंगल रूम था. रूम देख कर मैं बहुत खुश थी. हॉस्टल में आते ही जो अनुभव मुझे हुआ वो मैं आपको बताती हूँ।

शाम को हॉस्टल में सभी नए और पुराने स्टुडेंट डिनर के लिए मेस में जा रहे थे. रूम के बाहर ही मुझे तीन सिनियर लड़कियां टकरा गयी. उन्होंने मुझे देखा. मैंने उन्हें गुड इवेनिंग कहा. वो आगे निकल गयी , उनमे से एक मुड़कर वापस आयी और कहा – “क्या नाम है ......”

"कामिनी सक्सेना ..”

"डिनर के बाद १० बजे रूम नम्बर २० में मिलो ..."

"कोई काम है दीदी .."

"नई आयी हो. ... सभी को तुम्हारा स्वागत करना है .."

"जी ......अच्छा ....."

वो मेस में चली गयी. मुझे पसीना छूटने लग गया. मैं समझ गयी थी की अब मेरी रागिंग होगी .

राजू से मेरी पहली चुदाई

प्रेषिका : नेहा वर्मा

मैं अपना पहला सेक्स का अनुभव लिख रही हूं। उस समय मैं बी ए के दूसरे साल में पढती थी। सहेलियों की बातों से मुझे भी लड़कों से बात करने की इच्छा होने लगी थी। मैं दूसरी लड़कियों की तरह बनने संवरने लगी थी, मेक अप भी करने लगी थी। जब मैं कोलेज में पैन्ट पहन कर जाती थी तो उसमें से मेरे चूतड़ों की गोलाइयां बड़ी चिकनी और सुन्दर उभर कर दिखती थी। लड़के चोरी चोरी तिरछी निगाहों से मेरी गाण्ड को निहारते थे। जीन्स में मेरे बदन के कटस उतने उभर कर नहीं आते थे। लड़कों को इस तरह उकसाने में मुझे मज़ा भी आता था। मेरे मन में भी चुदाने की इच्छा होती थी कि सभी सहेलियां तो मज़े लेती हैं और मैं सिर्फ़ सुनती हूं।

मुझे कम्प्यूटर टीचर बहुत अच्छे लगते थे। वो नए नए आए थे, सुन्दर थे। उनके बाल हवा में उड़ते थे तो मैं देखती रह जाती थी। मैं उनके पास पास रहने की कोशिश करती थी। उन्हें सभी लोग राजू सर कह कर बुलाते थे। मेरी अदाओं को राजू समझता तो था, कहता कुछ नहीं था। पर चोरी चोरी मेरे स्तनों के उभार को और चूतड़ों की गोलाइयों को देखता था। मुझे लगा कि ये सर तो पट जाएंगे……थोड़ी कोशिश तो करनी पड़ेगी ही।

एक दिन मैंने उनसे पूछा - सर ! मैं आपसे ट्यूशन पढना चाहती हूं, क्या आप मुझे कम्प्यूटर सिखाएंगे?

“हाँ हाँ जरूर ..अपने पापा को बता देना …”

“पापा ने ही कहा है ..”

ग्रुप सेक्स

प्रेषक : राज अवस्थी

हाय दोस्तों ! मैं राज फ़िर कोलकाता से. मेरी पिछली दो कहानियाँ ' एक सच्ची कहानी' और 'पति के सामने बीवी की चुदाई ' आप लोंगों ने जरुर पढ़ी होगी. ये दोनों कहानियाँ मेरे सच्चे अनुभव पर आधारित थीं.

इन दोनों कहानियों को पढ़कर बहुत से लोगों ने मुझे मेल किया. उनमे से एक जिसका नाम मनु था उसने लिखा कि वो भी इस तरह का सेक्स करना चाहता है. उसकी उम्र ३२ वर्ष और उसकी बीवी नीतू की २८ वर्ष है. मनु ने मुझसे कहा कि नीतू एक समय में दो - तीन मर्दों के साथ सेक्स करना चाहती है. ये लोग भी कोलकाता के रहने वाले हैं. लेकिन मनु की इच्छा स्वैपिंग की थी. मनु ने मुझसे कहा कि पहले तुम और मैं मिलकर नीतू को चोदेंगे फ़िर बाद में पूजा(मेरी बीवी को). लेकिन पूजा तैयार नहीं थी. इसलिए मैंने उनका परिचय सन्नी और सीमा से करा दिया. जो लोग सन्नी और सीमा के बारे में नहीं जानते उन्हें थोड़ा परिचय करा दूँ.

सन्नी- उम्र - ३० , गोरा, लंबा

पति के सामने बीवी की चुदाई

प्रेषक : राज अवस्थी

दोस्तों मैं राज कोलकाता से. आपने मेरा पहला अनुभव ’ एक सच्ची कहानी’ के रूप में पढ़ी होगी. इसके जवाब में मुझे कई ई मेल मिले. बहुतों को ये कहानी झूठी लगी.

लेकिन सच तो हमेशा सच ही रहता है. इस कहानी से मुझे एक दोस्त मिली. जो की मुझे रोज ४-५ मेल करती है और मुझे भी उसके ई मेल का इंतेजार रहता है.

खैर, मैं सेक्स के बारे में शुरू से ही बहुत सक्रिय रहा हू. मेरी शादी के दस साल हो गये हैं. इस वेबसाइट पर कहनियाँ भेजने वाले और पढ़ने वाले ज़्यादातर शादीशुदा लोग ही होंगे ऐसा मैं सोचता हू.

रवि और चिंता के साथ सेक्स करने के बाद से मेरी इच्छा और ऐसा करने को करने लगी. उस समय के बाद जब मैं पूजा (मेरी बीवी) के साथ सेक्स करता तो मुझे ऐसा ख्याल आता की अगर एक और कोई मर्द होता और हम दोनो मिलकर पूजा को फक करते तो कैसा लगता. इसके बाद मुझे ख्याल आया वाइफ स्वापिंग के बारे मे. इसके बारे में बहुत चर्चा हो रही थी. मैं ये सोचता था की क्या ऐसा होता है. मैने अपनी बीवी से कहा तो पहले तो उसने झिड़क दिया. महीनो कोशिस करने के बाद वो तैयार हुई लेकिन इस शर्त पर की मर्द उसकी पसंद का होगा और ये केवल एक ही बार ऐसा करेगी. मेरा ख्याल था की अगर वो किसी के साथ राज़ी होती है तो शायद मेरी २:१ ( दो मर्द और एक औरत) की इच्छा पूरी होगी.

इसके बाद मैने ऐसे जोड़ो की नेट पर तलाश शुरू की. संपर्क हुआ लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी. किसी को मैं नही पसंद आया तो कोई मिलने की बात उठते ही जवाब देना बंद कर दिया तो किसी को मेरी बीवी ने पसंद नही किया. एक – दो जोड़ो ने अपनी फोटो भी भेजी थी लेकिन बात नहीं बनी. कहने को तो सब तैयार थे लेकिन वक्त पर सबने अपने पैर पीछे खींच लिए.

काम वाली की चूत

प्रेषक : संदीप

हय फ्रेंड्स! मेरा नाम संदीप है और मैं दिल्ली में रहता हूँ. मेरा लण्ड ६.५ इन्च का है और मेरी हाईट ६.२ फ़ीट शरीर सामान्य.

तो फिर बात ऐसी है कि मेरी कोई गर्ल-फ़्रेन्ड नहीं है और मैं अक्सर अपने फ्रेंड्स की गर्ल-फ़्रेन्ड को देख कर परेशान सा होया करता था कि भगवान् मेरी कब सुनेगा. लेकिन उसक घर देर है पर अंधेर नहीं है.

अचानक मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी जोकि हाईट में मुझ से बहुत छोटी थी मैंने मन ही मन कहा कि क्या माल है लेकिन फिर कहा कि यार ये तो अभी छोटी है लेकिन मैं ग़लत था उसकी हाईट ही बस छोटी थी बाकि और सब बड़े बड़े कसे हुए थे. मैंने कहा यह लड़की अगर मेरी फ्रेंड बन जाए तो क्या बात है और इतिफाक से वोह मेरे घर की तरफ़ ही आ रही थी।

मिसेज शान्ति और उनकी बेटी

प्रेषक : अमित

हाय, मेरा नाम अमित है। मैं आज आपको एक सच्ची घटना बता रहा हूं

हमारे घर के पास एक मिसेज शान्ति यादव रहती हैं, उम्र लगभग 32 साल, 4 बच्चे जिनमें तीन लड़कियां- दीपा उन्नीस, अन्नु अठारह और चेतना तीनों में छोटी है और सबसे छोटा एक लड़का।

आन्टी बहुत सुन्दर हैं। मैं उन्हें बहुत पसन्द करता हूं और उनकी चूत, चूचियों का दीवाना हूं। मेरी उम्र तब 28 साल की थी।

आन्टी मुझे अक्सर छोटे मोटे काम के लिए बुला लेती थी। एक दिन आन्टी ने कहा- तुम मेरे सारे काम कर देते हो, अगर तुम्हें मुझ से कोई काम हो तो कह देना।

मैंने कहा- आन्टी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, आप बहुत सुन्दर हैं, इसलिए मैं आपके सारे काम कर देता हूं।

आन्टी ने कहा- मैं तुम्हें कहां से सुन्दर दिखती हूं-मेरी उम्र भी काफ़ी हो चुकी है।

मैंने कहा - आन्टी आप इस उम्र में इतनी सुन्दर हैं तो अपनी जवानी में क्या होंगी। आपकी फ़ीगर भी अच्छी है

आन्टी हंसते हुए बोली- चलो किसी को तो मैं अच्छी लगी।

फ़िर मैं वहां से चला आया। लेकिन मैं उनके बारे में ही सोचता रहा।

अधूरी प्यास की तृप्ति

प्रेषक : नीरज गुप्ता - उस्ताद जी

आप ने मेरी आपबीती “मेरी यादगार सुहागरात” पढ़ी होगी. ये भी एक आपबीती ही है, लेकिन मेरी ख़ुद की नही, बल्कि मेरे इंस्टिट्यूट में पढने आने वाले एक लड़के राज की. वो २२ साल का एक ठीक दिखने वाला पाँच फुट नौ इंच लंबा, करीब ३२ इंच कमर का ठीक ठाक लड़का है. वो भरतपुर का रहने वाला है और उधर उनका अपना ख़ुद का मकान है.

राज मेरे पास कंप्यूटर कोर्स करने जयपुर आया हुआ है. वो बीच बीच में अपने घर जाता रहता है. उस मकान के एक हिस्से में उन्होंने एक किरायेदार रखा हुआ है.

किरायेदार के एक लड़का और एक लड़की हैं. लड़की की शादी हो चुकी है और जब वो प्रेगनंट हुई तो अपने मायके में आ गई. लगभग पूरे दिन थे तो उसकी मम्मी ने अपनी देवरानी को घर के काम काज में हेल्प के लिए बुलवा लिया. ये चाची भी जयपुर में ही रहती है. शादी शुदा बेटी से धीरे धीरे राज की सेटिंग हो गई. जब भी मौका मिलता उसके बूब्स दबा देता और किस करता रहता था. लेकिन चोदना इसलिए नही हो पाया कि उसे पूरे दिनों की प्रेगनेंसी थी. लड़की की चाची भी आ गई गोल चेहरा, सुता हुआ पाँच फुट चार इंच का बदन, आकर्षक चूचियां कि पूरी हथेली में आ जायें. चाची ३५-३६ साल की है और तीन बच्चों की माँ होते हुए भी नई नवेली जैसी लगती है.

राज ने चाची से बातचीत शुरू की, चाची ने भी इंटेरेस्ट लेना शुरू कर दिया, एक दिन मौका पाकर राज ने चाची से किस मांग लिया. तो चाची ने नाराजगी दिखाई. राज बेचारा अपना सा मुह लेकर डर गया और चुपचाप अपने कमरे में चला आया.

मेरी पत्नी की ओफ़िस में चुदाई

प्रेषक : राज कुमार

मेरा नाम राज है और मेरी पत्नी का नाम इला। उसकी उमर रंगरलियां साल की है। वो एक ओफ़िस में काम करती है। मैं रोज शाम को उसे ६ बजे कार में लेने जाता हूं। इला देखने में बहुत सेक्सी है।

आज इला का फ़ोन आ गया कि उसे ओफ़िस में जरूरी काम है इस्लिए उसे देर हो जाएगी और वो ओटो से घर आ जाएगी। मैं भी घर जा कर आराम करने लगा। अचानक मुझे एक जरूरी काम याद आ गया। मैं वो काम करने बाज़ार गया। अपना काम करने में मुझे दो घण्टे लग गये। मैंने सोचा कि इला भी फ़्री हो गई होगी तो उसे भी साथ ले चलूं। मैं वहीं से इला के ओफ़िस की तरफ़ चल पड़ा।

एक मस्ती का सफर

प्रेषिका - नेहा वर्मा

मैं जब २५ साल की थी. मैं उस समय झाँसी में रहती थी. मेरी जयपुर मैं नई नई नौकरी लगी थी. मुझे २ दिन बाद जयपुर जाना था. पापा ने अपने ऑफिस का ही एक काम करने वाला, जो जयपुर में रहता था, उसे मेरे साथ में भेजने के लिए तैयार कर लिया था.

घर की बेल बजी तो मैंने बाहर निकल कर देखा. एक सजीला २५ -२६ साल का लड़का बाहर खड़ा था. मैंने पूछा - "कहिये ... किस से मिलना है ..."

उसने मुझे देखा तो वो बोल उठा -"अरे नेहा ... तुम यहाँ रहती हो .."

"हाय ... तुम अनिल हो ... आओ अन्दर आ जाओ ..." उसे मैंने बैठक मैं बैठाया।

अनिल मेरे साथ कॉलेज में पढ़ता था. उसने बताया कि वो अब पापा के ऑफिस में काम करता था.

"अंकल ने बुलाया था ... जयपुर कौन जा रहा है .."

" मैं जा रही हूँ ..."

"अंकल ने मुझे आपके साथ जाने को कहा है .... रिज़र्वेशन के लिए बुलाया था ... मैं भी २ दिन बाद जा रहा हूँ "

मेरी चैट दोस्त नैना

हेल्लो फ्रेंड्स , मेरा नाम राहुल है और मैं जयपुर का रहने वाला हूँ। मैं हमेशा जब भी फ्री रहता हूँ देसी कहानियाँ जरूर पढता हूँ। और स्टोरीज पढने के बाद मुझे लगता है कि मुझसे कोई लड़की कयू नहीं सेक्स कराती है मुझे में कोई कमी भी नही मैं ५' १०" समार्ट लड़का हूँ और किसी भी लड़की को सेक्स में सैटिस्फ़ाई करने में एकदम सक्षम हूँ। लेकिन मुझे लगा कि मेरे पास लड़कियो को पटाने की हिम्मत नही एक डर रहता था मुझे कि कही कोई लड़की मुझे मना ना कर दे वरना मेरा दिल टूट जाएगा। मेरी उमर २७ साल है एकदम हट्टा कट्टा जवान लड़का हूँ जब मैं १० साल का था तब से किसी लड़की के साथ सेक्स करने का सपने देखा करता था। मैने बहुत सारी सेक्स बुक्स पढी और सेक्स मूवी देख कर एक ही सपने देखा करता था कि काश उस लड़की के साथ मैं सेक्स कर रहा हूँ। लेकिन सपनो को सच होने में पूरे १४ साल लगे। यह मेरी पहली कहानी है और अब आप के सामने है जल्दी और भी कहानी आप के सामने आने वा्ली है तो एनजोय करो दोस्तो।

शादी की रात

लेखिका-प्रेषिका : नेहा वर्मा

मैं यानि मुग्धा, कविता और ऋतू पक्की सहेलियां हैं. हम तीनो की कोई बात आपस में किसी से छुपी नही रहती थी. हम तीनो में सबसे सुंदर मैं ही हूँ. पर कविता और ऋतू भी दिखने में सुंदर ही कहलाती हैं. कविता की शादी हुए २ साल हो चुके हैं. उसका एक बेबी बॉय भी है. कविता का पति एक तराशे हुए बदन का मालिक है. वो भी हमसे बहुत हिलमिल गया है. अक्सर ही हम लोग एक दूसरे के यहाँ पार्टी रखते हैं और साथ साथ हँसी मजाक करते हैं.

मेरी इच्छा भी अब होने लगी कि मैं भी अंकित के और करीब आऊँ. मुझे वो अच्छा भी लगता है.

मैंने अपनी और देखा. मेरा जिस्म भी सेक्सी है. मेरे स्तनों का उभार भी सुंदर है. गोलाई लिए सीधे ताने हुए, किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं. मेरी कमर पतली है. मेरे चूतड थोड़े से भारी हैं. दोनों चूतडों की फांकें गोल और कसी हुयी हैं. चलते समय मेरी चूतडों की दोनों गोलाईयां ऊपर नीचे लहराती हैं. अंकित मुझे चोरी चोरी तिरछी निगाहों से देखते रहते थे. मैं उन के करीब रहने की कोशिश करने लगी. मैं कविता के यहाँ अधिक जाने लगी. अब अंकित भी मेरे से सेक्सी मजाक करने लगा था.

टीचर्स डे

लेखिका-प्रेषिका : कृति भाटिया

यह बात तब की है जब मैं ११वीं में पढ़ती थी. मैं एक को-एड स्कूल में पढ़ती थी जिस में लड़के और लड़कियां दोनों साथ में पढ़ते हैं और हमारे स्कूल में लड़के पैंट शर्ट और लड़कियां स्कर्ट शर्ट पहनते हैं टाई के साथ. वो मेरे स्कूल के सबसे सुनहरे दिन थे. मैं अपनी क्लास में सबसे सुंदर थी, ऐसा मुझे कई लड़के कह चुके थे पर मैं ये बात किसी और के मुंह से सुनना चाहती थी.

हाँ ! आईने के सामने खड़े हो के ख़ुद को निहारती भी थी कभी बालों को समेटती कभी बिखेरती कभी अपनी माँ का बलोउस और पेटीकोट पहन के साड़ी पहनने की कोशिश करती तो कभी फव्व्वारे के नीचे अपनी नाईटी पहन के नहाती !!

उन दिनों मैं अपने यौवन के शिखर पे थी मेरे उभरते हुए स्तन और खूबसूरत जांघें सबको लुभाती थी.. मेरी क्लास के सभी लड़के मुझ पे जान छिड़कते थे..पर मैं १२वीं में पढने वाले एक लड़के को बेहद पसंद करती थी उसका नाम वरुण था वो बेहद स्मार्ट और हैंडसम था. उसकी हाईट करीबन ६ फीट रही होगी और मैं ५.६ फीट की थी पर हील्स पहन के उसके कंधे तक पहुँच ही जाती थी।

दोस्ती या प्यार

कामिनी सक्सेना

मेरी नई नई नौकरी लगी एक साल हो गया था. मेरे ऑफिस में एक ही लड़की मैं थी. मेरी टेबल के पास संजय की टेबल थी. मैं किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी. बाद में मेरी दोस्ती संजय से हो गयी थी. मैंने उस से कहा कि वो अपनी सेक्स के पल अन्तर्वासना के पाठकों को भी बताये ...जिस से सभी उन बातों का मजा ले सकें. संजय होमो का शौकीन भी था. उसी की लेखनी से प्रस्तुत है यह कहानी.

हाय मेरा नाम संजय है. मेरी नौकरी लगे हुए २ साल हो चुके हैं. मुझे कंपनी की तरफ़ से मकान मिला हुआ है. मेरे साथ वाला मकान कामिनी का है. ये मकान दो मकानों के जोड़े में है. जिसकी एक ही चारदीवारी है. और पीछे एक चौक है जो दोनों मकानों को एक दरवाजे के द्वारा जोड़ता भी है.

अ सेक्सी नाइट विद सोफिया

प्रेषक : सावन शर्मा

हेल्लो दोस्तों ! आज आपका दोस्त फ़िर से हाजिर है चुदाई के एक नए कारनामे के साथ. दोस्तों में अब तक आपको अपने दो सेक्सी घटनाओं के बारे में बता चुका हूँ. दोस्तों आज एक ऐसी कहानी आपके सामने लेकर आ रहा हूँ जिस कहानी का हर एक मोड़ सारी लड़कियों की चूतों को मजबूर कर देगा उनकी पैंटी को गीला कर देने के लिए और हर लड़के के लंड को भड़कने के लिए.

दोस्तों गरेजुएशन कर लेने के बाद मैंने इक कंपनी में मार्केटिंग मेनेजर की जॉब जों कर ली मेरा काम होता था अपने प्रोडक्ट की प्रमोशन के लिए लोगों से मिलने का. एक बार मुझे अपने एक प्रोडक्ट प्रमोशन के लिए नैनीताल जाना पड़ा. मुझे वहां पर एक डिरेक्टर को मिलना था. मैं थोड़ा सा परेशां भी था की पता नहीं कोन होगा किस मिजाज़ का बन्दा होगा. मैं तब तक मीटिंग रूम में इंतज़ार कर रहा था मेरे सामने काफी का कप रखा था.

दिल्ली काल बोय की चुदाई

हेल्लो रीडर्स!

हाउ आर यू ,

मैं लक्ष्य हूँ दिल्ली से ! आई ऍम अ काल बॉय. मेरी उमर २८ साल है और हाईट ५ .७ और मेरा लंड ७ इंच लंबा और ३ इंच मोटा है.

कुछ दिन पहले ही मुझे १ मेल मिली जिसमे उस लेडी ने मुझसे मिलने की बात लिखी और अपना फ़ोन नम्बर दिया था. मैंने फ़ोन पर बात की तो उसने बताया की वह ग्रेटर कैलाश में रहती है और उसके पति अमेरिका में जॉब करते हैं. उसने मुझे अपने घर का पता बताया और कहा कि कल २ बजे उसके घर आ जाऊं.

अगले दिन मैं पता ढूंढते हुए उस एड्रेस पर पहुंचा और बेल बजाई तो दरवाजा खुला और १ करीब २६ साल की गोरी लेडी ने दरवाजा खोला तो मैंने बताया की मैं- लक्ष्य ! तो उसने मुस्कराकर मुझे अन्दर बुला लिया. जब वो मेरे आगे चल रही थी तो मैंने देखा कि उसकी गांड बहुत सुंदर थी उसका साइज़ ३४ -२८ -३२ था.

मेरी पड़ोस वाली भाभी

प्रेषिका : प्रिया-प्रीति

प्यारे दोस्तो !

मैं राहुल …आप लोगों को अपनी पहली कहानी सुनाने जा रहा हूं।

एक दिन मैं अपने घर की तरफ़ जा रहा था कि मैंने देखा कि कोई मुझे बुला रहा है। मैं उनके पास गया तो देखा कि वो मेरे पड़ोसी हैं और बहुत ज्यादा पीने की वजह से वो चल नहीं पा रहे हैं। मैंने अंकल की मदद की और उन्हें उनके घर तक छोड़ने गया। डोरबेल बजाई तो एक औरत ने दरवाजा खोला जिन्हें मैं भाभी बुलाता था और जब उन्होंने मुझे अपने पति के साथ देखा तो चिड़चिड़ाना शुरू कर दिया।

मैंने कहा- पहले अन्दर तो आने दो फ़िर जो मर्जी कह लेना, पर वो गुस्से से लाल हो रही थी। मैंने उनके पति को बेडरूम में ले जा कर लिटा दिया और वापिस जाने लगा तो मुझे अन्तर्वासना की एक कहानी याद आ गई और मैंने जानबूझ कर एक गिलास पानी मांगा तो भाभी पानी लेने चली गई। जब वो वापिस आई तो पानी पीने के बाद मैं उनसे बोला कि मुझे नींद आ रही है और मैं जा रहा हूं।

हमारा कुत्ता गैंग

प्रेषक : गौरव यादव

हाय मेरा नाम ललित है. मैं कोटा राजस्थान का निवासी हूँ. मै आपके लिए एक नयी स्टोरी लेकर आया हूँ तो चलिए ज्यादा समय न ख़राब करते हुए कहानी पर आ जाते हैं ये मेरी सच्ची कहानी है.

कुछ दिनों पहले में एक महिला से मिला उसका नाम स्वीटी था. वह हमारे ऑफिस की की नयी बॉस थी और में उस ऑफिस में छोटा सा क्लर्क था. वह काफी सुंदर नारी थी उसकी उम्र यही कोई २५-२६ साल के लगभग होगी उसका रंग दूध की तरह सफ़ेद था सही मायने में में वह एक सुंदर हुस्न की मालकिन थी.

शुरू से ही वह मेरे काम से काफी इम्प्रेस थी और सारे ऑफिस के सामने मेरी काफी तारीफ की तो मैं मन ही मन सोचने लगा की वह मुझे चाहने लगी है और घर लौटा तो मेरी माँ की तबियत बेहद ख़राब थी तो मैने ऑफिस से चार दिन की छुट्टी करने की सोच ली और मैने ऑफिस में छुट्टी की भी सूचना नहीं दी यह सोचा की स्वीटी मुझे कुछ नहीं बोलेगी और मुझ पर हमदर्दी जताएगी पर चार दिन बाद जब मैं ऑफिस पंहुचा तो मैं बस छूट जाने के कारण लेट हो गया था जब मैं ऑफिस पंहुचा तो ऑफिस का चपरासी मुझसे बोला की मैडम ने आपको उनके रूम मैं में बुलाया है

मेरा बलात्कार

लेखिका : नेहा वर्मा

संजय को हमारे घर पर आए हुए २ दिन हो चुके थे. संजय ३५ साल का था और इंदौर में नौकरी करता था. वो एक तरह से मेरे पापा का दोस्त था. वो दिखने में सुंदर और गोरे रंग का है. जब वो हमारे घर आया तो उसको देख कर मेरा मन मचल उठा. उसने भी जब मुझे देखा तो वो भी मेरी तरफ़ आकर्षित हो गया था. मैं दिखने में सुंदर हूँ. मेरे स्तन पूरा उभार ले चुके हैं. मेरा बदन गोरा और चिकना है. मेरे शरीर का कटाव, उभार और गहराइयाँ किसी को भी अपनी और खींच सकती हैं. खासकर मेरी चूतडों की गोलाईयां, और उसकी फांकें गोल और उभरी हुयी हैं. मेरी जींस उन गहराइयों में घुस जाती है. जो देखने में बहुत उत्तेजक लगती है।

संजय भी मेरी जवानी के जलवों से बच नहीं पाया. वो मुझसे बार बार बातें करने के बहाने या तो ख़ुद कमरे में आ जाता, या मुझे बुला लेता. मेरी इन सेक्सी हरकतों से उसका मन डोल गया. संजय ने वो हरकत कर दी जिसका मैं इंतज़ार कर रही थी.

माला की चुदाई

प्रेषिका : पुष्पा सोनी

मेरा एक दोस्त है योगराज। उसको अपनी एक गर्लफ़्रेन्ड माला को चोदना था, मगर उसके पास जगह की समस्या आ रही थी। चूंकि उस वक्त मेरे पास मेरे दोनो मकानों की चाबियां थी, उस को पता था कि मेरे पास दोनो मकानों की चाबियां हैं, उसने मुझसे मकान की चाबी मांगी तो मैंने सहर्ष दे दी।

वो माला को लेकर मेरे घर गया, मैं भी उसके साथ ही था। हम तीनों ने मिल कर पहले तो आराम से बीयर पी व खाना खाया। फ़िर योगराज माला को लेकर एक कमरे में चला गया और चोदन कार्यक्रम चालू कर दिया। अन्दर आ…ऊंह्…… धीरे……… धीरे… … की आवाजें आने लगी। आधे घण्टे बाद योगराज तो अपने घर चला गया, मगर जाते वक्त मुझे कह गया कि माला को सुबह जल्दी उसके घर पहुंचाना है।

पड़ोस वाली भाभी को चोदा

प्रेषक : समीर रंजन

हेलो फ्रेंड्स, मै समीर लखनऊ से

मेरी कहानी कुछ इस तरह है. ६ महीने पहले हमारे बाजु मे एक जोड़ा रहने आया. उनकी शादी हुए ७ -८ साल हुए थे पार उनका कोई बच्चा नही था .और वो करीबन ३२ साल के ही होंगे. उनके हसबंड का कुछ इंपोर्ट एक्सपोर्ट का बिज़नस था. थोड़े दिन रहने के बाद उनकी हमारी जान पहचान हो गई और हमारा उनका आना जाना हो गया. थोड़े दिनों बाद उस भाभी और मेरी दोस्ती हो गयी. वोह बहुत सेक्सी थी, वेसे भाभी का फिगेर होगा ३४ -२८ -३४ उसके बूब्स बड़े थे और सेक्सी थे जब वो चलती थी तो उसके बूब्स हिलते थे यह देख कर कोई भी मचल जाए. उसका हब्बी अक्सर महीने मे १५ २० दिन बाहर रहता था और मैं जब भी उसके घर पर जाता तो उसको देखता ही रहता और उसको चोदने की सोचा करता और घर आ कर मुठ मारता था. मैं उसके बूब और गांड के बारे मे सोच सोच कर मुठ मारा करता था. मैं जब भी उसके घर जाता तो, उसे देख के मुझे लगता था की वो उदास उदास रहती है.

सुहागरात से पहले

लेखिका : नेहा वर्मा

मेरी सगाई की तारीख पक्की हो गई थी। मैं जब सुनील से पहली बार मिली तो मैं उसे देखती रह गई। वो बड़ा ही हंसमुख है। मज़ाक भी अच्छी कर लेता है। मैं ३ दिनों से इन्दौर में ही थी। वो मुझे मिलने रोज़ ही आता था। हम दोनो एक दिन सिनेमा देखने गए। अंधेरे का फ़ायदा उठाते हुए उन्होंने मेरे स्तनों का भी जायज़ा ले लिया। मुझे बहुत अच्छा लगा था।

पापा ने बताया कि उज्जैन में मन्दिर की बहुत मान्यता है, अगर तुम दोनों जाना चाहो तो जा सकते हो। इस पर हमने उज्जैन जाने का कार्यक्रम बना लिया और सुबह आठ बजे हम कार से उज्जैन के लिए निकल पड़े। लगभग दो घण्टे में ७०-७५ किलोमीटर का सफर तय करके हम होटल पहुँच गये.

कमरे में जाकर सुनील ने कहा-"नेहा फ्रेश हो जाओ. ..नाश्ता करके निकलेंगे. ."

मैं फ्रेश होने चली गयी. फिर आकर थोड़ा मेक अप किया. इतने में नाश्ता आ गया. नाश्ते के बीच बीच में वो मेरी तरफ़ देखता भी जा रहा था. उसकी नज़ारे मैं भांप गयी थी. वो सेक्सी लग रहा था.

ऐन्नुअल डे - वार्षिकोत्सव

लेखिका : कृति भाटिया

मैं अपने पाठकों से देरी के लिए माफ़ी चाहती हूँ !

और शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ अन्तर्वासना की पूरी टीम का कि उन्होंने मेरी कहानी अधूरी होने के बावजूद प्रकाशित की।

मैं अपनी पिछली कहानी टीचर्स डे में एक जगह ऐसी छोड़ी थी जहाँ पे में चाहती थी कि मेरे पाठक मुझसे सवाल करें ...पर वो सवाल केवल मुझे एक ही इन्सान ने पूछा था .. जिसका जवाब मैं उन्हें दे चुकी हूँ .!!

साथ ही मेरी मेरे पाठकों से गुजारिश है कि मेरी कहानी पढके ये ना सोचें कि मैं एक अदद पार्टनर की तलाश मैं हूँ मैं जैसी हूँ सम्पूर्ण हूँ .. मुझे किसी की जरूरत नहीं इसलिए मुझे भद्दे और अश्लीलता भरे मेसेज ना करें, मेरी मेरे पाठको से इल्तिजा है की वो अगर ईमेल करके अपने विचार प्रस्तुत करेंगे तो अच्छा रहेगा.

अब कहानी पे आते हैं ..

टीचर्स डे के अगले दिन रविवार था यानि छुट्टी .. मैं सारा दिन उसके बारे मैं सोचती रही कि वो ऐसा क्यूँ है ... जब मैं उस से बात नहीं करती तो मुझे दूर से निहारता है और जब मैं उसे अपनी और आकर्षित करती हूँ तो मुझे डांट देता है ...

रेशमा की मस्त चुदाई

प्रेषक : राहुल प्रीतम

मैं वाराणसी, यू पी का रहने वाला हूं एवं मेरा नाम राज, उम्र बाईस साल है।

आज से चार साल पहले मैं अपने पड़ोस में एक परिवार के घर में आता जाता था। उस परिवार में पति, पत्नी और उनके चार बच्चे थे। पति मज़दूरी करता था। उसकी पत्नी का नाम रेशमा था, वो तीस साल की थी। धीरे धीरे मैं उनके घर ज्यादा आने जाने लगा। नैं उनकी छोटी बच्ची को खिलाता रहता था। रेशमा मुझे पसन्द करने लगी थी। मुझे भी वो अच्छी लगती थी। मैं रेशमा से बातें करते करते काफ़ी खुल चुका था और ओससे सेक्स के बारे में भी बातें करने लगा था।

एक दिन ऐसा हुआ कि रेशमा ने बाज़ार से कुछ सामान मंगवाने के लिए मुझे बुलाया, वह सन्दूक से पैसे निकालने लगी और मैं पलंग पर बैठ गया। अचानक रेशमा ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। मैं हक्का बक्का रह गया। उसने कहा कि मैं तुमसे प्यार करती हूं। उस समय मैं कुछ नहीं बोला पर जब मैं सामान ले कर वापिस आया तो उसने मुझे फ़िर गले लगा लिया। इस बार मैंने उसकी चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया, पर कोई देख ना ले। इस डर से मैं उस समय वहां से चला गया।

स्कूल में मस्ती-1

मैं दीपक, २५ साल का अविवहित युवक जयपुर में रहता हूं। पिछले साल तब मैं एक प्राईवेट स्कूल में पढाता था। उसमें लड़के लड़कियां दोनो साथ पढते थे। १२वीं क्लास में एक सुन्दर और सेक्सी लड़की निधि पढती थी, जो लगभग १९ साल की करीब ५ फ़ुट २ इन्च की थी।

मैंने जब उसको पहली बार देखा तो देखता ही रह गया। उसका चेहरा गोल काली काली आँखें गुलाबी होंट, कमर तक लंबे बाल और सीने पर संतरे जैसे दो उरोज। जब वो चलती थी तो उसके कूल्हे काफी आकर्षक लगते थे। उसको देख कर मुझे पता नही क्या हो जाता था, मेरे मन में हमेशा ही उसको चोदने का ख्याल आता था। कई बार उसको देख कर स्कूल के बाथरूम में ही जाकर मुठ मर कर अपनी इच्छा को शांत करता था और सोचता था कि कब इस जवानी को भोगने का सुख मिलेगा।

संयोग से एक दिन मुझे वह मौका मिल ही गया। सर्दियों का मौसम था और स्कूल का समय १० से ५ बजे का था। उस दिन जरूरी काम होने के कारण मैं ९ बजे स्कूल आ गया. थोडी देर बाद तकरीबन ९.१५ पर मुझे निधि आती दिखाई दी. वो काफी खुश दिखाई दे रही थी. मैंने सोचा कि उस से खुशी का और जल्दी स्कूल आने का कारण पूछता हूँ, जिससे उसके पास बैठने और बात करने का मोका भी मिलेगा. वो सीधे अपनी क्लास में चली गई. मैं पीछे पीछे उसकी क्लास में गया और दरवाजे की ओट से अंदर देखने लगा. उसने अपने बैग से कोई कागज़ निकाला और पढ़ कर मुस्कुराने लगी. मुझे लगा की हो ना हो वो किसी लड़के का पत्र पढ़ रही है. यह अच्छा मोका था उसे पकड़ने का, इसलिए मैं अचानक जाकर उसके सामने खड़ा हो गया. वो मुझे देखते ही घबरा गई और कागज़ को छुपाने का प्रयत्न करने लगी.

मैंने पूछा - निधि क्या छुपा रहो हो?

प्रेमिका को शादी के बाद चोदा

प्रेषक : सेक्सी बोय

दोस्तो ! मेरा नाम सैन्डी है, मैं दिल्ली में रहता हूं। कुछ साल पहले की बात है मैं करोल बाग मार्केट में कुछ खरीददारी कर रहा था, किसी ने मुझे पीछे से आवाज़ दी। देखा तो सुनीता खड़ी थी। बहुत खूबसूरत एक नवविवाहिता जैसी लग रही थी - हाथों में चूड़ा, गले में मंगलसूत्र और माथे पर सिन्दूर लगाया हुआ था।

सुनीता मेरी गर्लफ़्रेन्ड थी। कुछ महीने पहले हमारा अलगाव हो गया था, अलगाव क्या बस उसकी शादी कहीं और हो गई थी। वो 24 साल की एक स्मार्ट और बोल्ड लड़की थी। करीब एक साल हमारा अफ़ेयर खूब चला… इस बीच किस तो आम सी बात हो गयी थी। हम लोग घंटो नेहरू पार्क मैं बैठे एक दूसरे को चूमते रहते। मैं उसकी शर्ट मैं हाथ डालकर उसके बूब्स दबाता रहता और वो मेरी पैंट की जिप खोलकर मेरे लंड से खेलती रहती।

हम लोग कभी पिक्चर भी देखने जाते तो यही होता था। कार्नर की सीट पर वो मुझसे सट कर बैठती और मैं उसके गले में से हाथ डालता हुआ उसकी शर्ट में हाथ डालकर पूरे तीन घंटे उसके बूब्स मसलता रहता और वो मेरी जैकेट को मेरी गोद में रखकर उसके नीचे से हाथ डालकर मेरी जिप खोलकर मेरे लंड को बाहर निकाल लेती और पूरे तीन घंटे उससे खेलती रहती .. मूवी तो हम नही देख पाते थे लेकिन इस सेक्स का खूब मज़ा लेते थे। मैं उसके बूब्स सहलाता और मसलता था तो उसे बहुत मज़ा आता था और मैं तो कई बार उसके हाथ में ही झड़ जाया करता था।

तो हमारे अलगाव तक हमने सिर्फ़ इतना ही सेक्स किया था चुदाई नहीं। फ़िर अचानक पता चला कि उसने कहीं और शादी कर ली है, बस वो कभी मेरा सामना नहीं कर पाई जो मेरे घर से करीब १ किलोमीटर की दूरी पर ही रहती थी….खैर तो ये थी हमारी छोटी सी कहानी …अब असली बात पर आते हैं

सहेलियों की चुदाई

प्रेषक : चिन2 सहा

मैं जहाँ जॉब करता हूँ वो रिहायशी इलाका है. वहां २ -३ लड़कियां रूम किराए पे लेकर रहती थी. उनमें से एक मुझे देखती रहती थी। मुझे लगा कि वो पट जाएगी। एक दिन ऑफिस के बाद मैं जा रहा था कि वो अकेली ही सड़क पर मिल गई। मैंने उसे रोका और प्रोपोज़ कर दिया दोस्ती के लिए। मैंने उसे अपना सैल नम्बर दिया तो उसने ले लिया। फ़िर मैंने उससे नम्बर मांगा तो उसने कहा कि उसके पास मोबाईल नहीं है।

एक दो दिन बाद वो फ़िर मिल गई तो मैंने उसे कहा कि कहीं अकेले में चलते हैं तो उसने पूछा कि कहां?

मैं कोई उत्तर ना दे सका कि कहां चलेंगे। मैंने कहा कि कई बार मैं ओफ़िस में अकेला होता हूं तब तुम्हें बुलाऊंगा। तो उसने कहा क्या करोगे?

मैंने बिना सोचे समझे कह दिया कि हम दोनो प्यार करेंगे। वो शरमा गई।

ग्रुप सेक्स-२

प्रेषक : राज अवस्थी

हेल्लो दोस्तों मैं राज फ़िर कोलकाता से.

नीतू की चुदाई के बाद हम लोग बहुत थक गए थे. इसलिए सभी सो गए. जब नींद खुली तो शाम के ४ बजने वाले थे. सबको भूख लगी थी. हमने रूम सर्विस को लंच आर्डर किया लंच आने के बाद हमने खाया. शाम के करीब ५.३० बजे बाहर निकलने का प्रोग्राम हुआ. जिस रिसॉर्ट में हम ठहरे थे वो समुद्र के किनारे पर था. लड़को ने शोर्ट्स और टी शर्ट और लड़कियों ने लॉन्ग स्कर्ट पहनी थी.

होटल से निकलने के समय मेरी नजर सीमा के पिछवाडे पर गई तो मुझे लगा कि उसने पैंटी नहीं पहनी थी. खैर हम समुद्र के किनारे धीरे-धीरे टहलने लगे. ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी. कुछ देर टहलने के बाद हम एक जगह गोलाई में बैठ गए. ऑफ़ सीजन होने के कारण बीच पर ज्यादा भीड़ नहीं थी. रात होने लगी थी. मेरे दायें तरफ़ सीमा बैठी थी, बाएं नीतू. हम सेक्स के बारे में बातें कर रहे थे.

पहले सीमा ने अपनी सेक्स की काल्पनिक इच्छा के बारे में बताया कि मेरी इच्छा है की ३ मर्द मुझे एक साथ चोदे. हमने कहा कि तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी होगी आज रात को.

सेक्सी बी ई की टीचर को चोदा

प्रेषक : राज शर्मा

अन्तर्वासना के नियमित पाठको को मेरी तरफ़ से सलाम और पाठिकाओं की चूतो को मेरा रस भरा किस. दोस्तों मैंने बहुत सारी कहानिया यहाँ पर पढ़ी तो लगा कि ये तो सब के साथ होता है और इसे सबके साथ बाटने में कोई बुराई नही है, सो मै भी अपनी कॉलेज लाइफ की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ.

मै ऍम बी ए का स्टुडेंट हूँ. मै जिस कॉलेज में हूँ, वो इस शहर का सबसे मशहूर कॉलेज है। हमारे कॉलेज के बगल में ही हमारे कॉलेज ग्रुप का ही इंजीनियरिंग का भी कॉलेज है। मैंने आपको अपना नाम नही बताया मेरा नाम है राज। इंजीनियरिंग की एक मैडम है जिनका नाम निशा है, जो कि बहुत ही खूबसूरत है। जब से मैंने यहाँ प्रवेश लिया है और उनको देखा है हमेशा उनको कहीं न कहीं देखता रहता हूँ, कभी कभी वो भी देखती है तो मेरी आँखे उनसे टकराती हैं तो वो मुस्कुरा देती हैं, जिससे मेरी हिम्मत बढ़ जाती है। उनका फिगर ३६-२८-३४ है जो कि बहुत ही सेक्सी है.वो गोरी तो है ही.

माऊंट आबू में मुम्बई की लड़की

हाय

मैं अली २३ साल जयपुर से हूँ.

बात तब की है जब मैं माउंट अबू में रहता था मेरी फॅमिली के साथ. वहां मेरे पापा ने एक शोरूम खोला था उस समय मैं भी कुछ दिनों के लिए गया था वहां.

तो वहां हमारे शोरूम के आस पास बहुत से होटल हैं और उन होटल में से एक होटल का मेनेजर मेरा अच्छा दोस्त बन गया था। क्यूंकि मुझे चिकेन मटन ज्यादा खाने की आदत है, तो मैं एक दो दिन मैं होटल में खाना खाता था और मेनेजर और मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी थी। हम अक्सर शाम को साथ में रहते थे.

बात उस रोज की है जब बोम्बे के एक गर्ल्स कॉलेज का टूर माउंट आबू घूमने के लिए आया था। उनमे से मुझे एक लड़की बहुत सुंदर लगी उसकी उमर होगी करीब १९ साल. गोरी चिट्टी, लम्बी पोरी, मस्त एक दम सेक्स बम्ब लग रही थी, दिल कर रहा था अभी के अभी खा जाऊं मगर इतनी सारी लड़कियां थी उसके साथ.

कोमल का डिल्डो

लेखिका : नेहा वर्मा

आज मेरे पास कोई काम नहीं था. मैं यूँ ही साथ वाले घर में अपनी सहेली कोमल से मिलने चली गयी. मेरी इस कहानी की नायिका कोमल है. उसकी शादी हुए लगभग ५ महीने हो गए थे. वहां हम सभी ने यानि कोमल, उसके पति रमेश और मैंने सुबह का नाश्ता किया. बातों बातों में कोमल ने बताया कि रमेश ३ दिनों के लिए दिल्ली जा रहा है. उसने मुझे तीन दिनों के लिए अपने यहाँ रुकने के लिए कहा. मैंने उसे अपनी स्वीकृति दे दी.

शाम को ८ .३० पर रमेश की गाड़ी थी. हम दोनों रमेश को स्टेशन पर छोड़ कर ९ .३० तक घर लौट आयी. हमने घर आकर अपने रात को सोने के कपड़े पहने. और बिस्तर ठीक करने लगे. फिर हम दोनों ही बिस्तर पर लेट गए. कोमल मुझे अपनी शादी के बाद के उन दिनों के किस्से सुनाती रही. उन दोनों ने कैसे अपनी सुहाग रात मनाई और .... उसके बाद की बातें भी बताई. मैं बड़े शौक से ये सब सुनती रही और रोमांचित होती रही. वो ये सब बताते हुए उत्तेजित भी गयी. मुझे इन सारी बातों का कोई अनुभव नहीं था. पर मान में ये सब सुन कर मुझे लगा की इसका अनुभव कितना सुखद होगा. ये सोचते सोचते मैं जाने कब सो गयी.

टेनिस टूरनामेन्ट

लेखिका : कृति भटिया

नमस्कार मेरे प्यारे पाठको !

मैं एक बार फ़िर से हाज़िर हूं अपनी कहानी का अगला भाग लेकर। आपने मेरी पिछली कहानियां "टीचर्स डे" और "ऐन्नुअल डे" तो पढी होंगी। आप वरुण और मुझ से तो वाकिफ़ ही होंगे। यह कहानी ठीक वहीं से शुरू है जहां "ऐन्नुअल डे" खत्म हुई थी।

सभी कहानियों में यह कहानी मेरे दिल के सबसे करीब है। कई बार इस कहानी को लिखते वक्त मुझे शब्दों की कमी महसूस हुई, अपने मन के भावों को शब्दों में ढालना सचमुच एक कठिन कार्य है, फ़िर भी मैंने अपनी पूरी कोशिश की है।

गुरूजी ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद मेरी कहानियां प्रकाशित करने के लिए।

अगर आपका प्यार इसी तरह बना रहा तो मैं अन्तर्वासना के माध्यम से आपको अपनी कहानी के अगले भाग भी पहुंचाती रहूंगी।

उस दिन बस में वरुण के मुंह से इतनी सीरियस बातें सुनने के बाद मैं उससे अपने दिल की बात कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाई और मैंने सोच लिया कि अपने मन की बात उसे कभी नहीं बताऊंगी, क्योंकि मैं वरुण को किसी भी रूप में खोना नहीं चाहती थी। उसके साथ के लिए अगर मुझे उसकी दोस्ती निभानी पड़ती है तो वही सही।

इसीलिए मैंने अपने दिल के अरमान अपने होठों तक कभी ना पहुंचने देने का तय किया, पर नज़रें हमेशा दिल का साथ देती हैं…दिमाग और जुबान चाहे कितनी भी कोशिश करके खुद को जताने से रोक लें… पर दिल की बात कहने के लिए सिर्फ़ एक नज़र ही काफ़ी होती है।

उस दिन शाम को हम होटल पहुंचे। जयपुर वाली ब्रांच ने दो कमरे बुक करा रखे थे, एक बिना ऐ सी डबल बेडरूम दो विद्यार्थियों के लिए और एक ऐ सी सिंगल बेडरूम हमारे अध्यापक के लिए।

सर ने वरुण से कहा- मैं बेड शिफ़्ट करवा देता हूं, तुम मेरे कमरे में मेरे साथ सो जाना और कृति वहां आराम से सो जाएगी। सर को मुझ पर और वरुण पर भरोसा नहीं था और हो भी क्यों??? कच्ची उमर में ही ऐसी गलतियां होती हैं, पर वरुण ने सर को भरोसा दिलाते हुए कहा,"आप जैसा सोच रहे हैं, वैसा कभी नहीं होगा, मुझे अपनी मर्यादा और समाज के बंधनों का पूरा ख्याल है, मुझे आपके साथ सोने में कोई दिक्कत नहीं है अगर आपका कमरा भी बिना ऐ सी हो तो। मुझे ऐ सी से अलर्ज़ी है, ऐ सी की हवा में मेरे सर में तेज़ दर्द हो जाता है।"

उसकी वाजिब परेशानी सुनकर सर मान गए और सर और हम अपने अपने बैग लेकर अपने कमरे में चले गए। सर के कमरे का तो पता नहीं पर हमारा कमरा काफ़ी अच्छा था। वहां कमरे के बीचों बीच दो बिस्तर लगे थे। दोनो के बीच का फ़ासला करीबन चार फ़ीट रहा होगा।

जिसपे क्रीम कलर की बेडशीट थी उसपे एक ओढ़ने के लिए कम्बल और एक चादर थी .. अटैच्ड बाथरूम था कमरे में घुसते ही सबसे पहले सामने की तरफ़ एक खिड़की थी, जिस के उस तरफ़ एक खूबसूरत बागीचा था। उस खिड़की पर जाली वाले परदे लगे थे और दरवाजा सरकाने वाला था वहीँ खिड़की के बायीं तरफ़ एक टेबल रखी थी जिस पर एक रूम सर्विस के लिए फोन, इंटर कॉम नम्बर की लिस्ट, एक पानी का जग और दो गिलास पड़े थे। टेबल के ठीक बायीं तरफ़ कुछ दूरी पे एक टेबल और थी जिस पर टीवी रखा था (पर उसपे सिर्फ़ न्यूज़ चैनल ही आते थे ) टीवी की टेबल के निचले हिस्से में एक कपबोर्ड था, उसमें उस दिन का न्यूज़ पेपर था हिन्दी और इंग्लिश दोनों और एक स्पोर्ट्स मैगजीन थी.

टीवी से दोनों बिस्तर की दूरी एक बराबर थी. दोनों बिस्तर के बीच में एक और साइड टेबल रखी थी जिसपे एक लैंप रखा था जिसके दो स्विच कनेक्शन दोनों बिस्तर की तरफ़ थे. वरुण मेरे से आगे चल रहा था इसीलिए कमरे में भी पहले वोही घुसा था और उसने घुसने के साथ ही खिड़की के पास वाले बिस्तर पर अपना बैग पटक दिया और राक्केट पास वाली मेज़ पर रख दिया. मेरे पास और कोई चोइस न थी इसीलिए मैंने अपना सामान दूसरे बिस्तर पर रख दिया .. और बाथ रूम देखने चली गई .. बाथ -रूम कमरे के मुकाबले बेहद सुंदर था .. व्हाइट टाईल्स, व्हाइट कमोड, व्हाइट वाश बेसिन, सुंदर सजावटी शीशा .. के साथ सभी टोंटियां सिल्वर कलर की थी। वहाँ हस्त फव्वारा भी था और सीलिंग फव्वारा भी .. सलैब पर दो व्हाइट टोवेल्स रखे थे साथ में साबुन, शैंपू, कंघा.

खैर मैं वापिस कमरे में आई .. वरुण ने कमेन्ट किया .. अन्दर जाके सो गई थी क्या .. इत्ती देर लगा दी .. कभी किसी होटल में नहीं गई हो क्या .. ऐसे देख रही हो जैसे कभी देखा न हो ...

मैंने उसे कहा .. तुम्हे देखूं तो तुम्हे दिक्कत है, होटल को देखूं तो तुम्हे दिक्कत है ..मतलब अब मुझे सब काम तुम्हारे हिसाब से करने होंगे ... इसपे उसका मुंह सड़ गया ..और वो अपने बैग से चेंज करने के लिए कपड़े निकलने लगा .. कपड़े निकलने के बाद उसने बाथ रूम में जाकर कपड़े बदल लिए ..और उसके बाद मैंने भी जाकर कपड़े बदल लिए .. हम दोनों ने अपने अपने बैग अपने पलंग के नीचे घुसा दिए ..!!

वो खिड़की से बाहर का नज़ारा देखने लगा .. बगीचे में बहुत सरे पेड़ थे खूब सारे फूल और उन पर मंडराते भँवरे और तितलियाँ ...पर मेरे भँवरे का मूड ऑफ़ था वो अपने फूल से नाराज़ था ...!!!

मैंने टीवी के नीचे से अखबार उठाया और पलंग पे बैठ के पढने लगी थोड़ी देर बाद फोन की घंटी बजी ... वरुण फोन के पास था इसीलिए उसी ने फोन उठाया .. सर का फोन था वो चाए, नाश्ता लेने के लिए हमें होटल के वेटिंग एरिया में बुला रहे थे।

फोन रखते ही उसने कहा- चलो!

मैंने कहा - कहाँ?

.. तो वरुण कहने लगा अब आई हो तो सोच रहा हूँ तुम्हे थोड़ा आस पास घुमा लाऊ .. !!!

मैंने कहा सच ..!!!

कहता .." इतनी खुश मत होवो .. सर नीचे बुला रे हैं चलो .."

ये वरुण की पुरानी आदत थी .. दिल में सपने जगा के तोड़ देना ..!!! पहले भी उसने ऐसा मेरे साथ कई बार किया था ...

मैंने थके हुए भाव से कहा चलो .. !! और हम नीचे पहुंचे सर पहले ही तीन चाय का आर्डर दे चुके थे .. सर ने पूछा की कमरे में कोई दिकत तो नहीं है .. हम दोनों ने एक ही स्वर में कहा हाँ .. सर ने फ़िर पूछा क्या दिक्कत है .. हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ़ इशारा करते हुए ऊँगली उसके कहा इस से ..!!

सर हँसने लगे .. कहते अभी से लड़ रहे हो साथ में खेलोगे कैसे .. हम दोनों एक दूसरे की तरफ़ देखने लगे ..

और साथ साथ बोले ... हम और साथ में .... ना ह ..!!!!

सर फ़िर से मुस्कुरा दिए .. तब तक चाए आ गई और कुछ बढ़िया से पकोड़े भी ..मुझे पकोड़े बेहद पसंद हैं और तब मैंने जाना कि वरुण को भी पकोड़े बहुत पसंद हैं ..!!!

चाय पीने के बाद सर ने हमें बताया कि चूँकि अलग अलग शहरों से स्कूल के बच्चे आए हुए हैं इसीलिए उन सभी के डिनर का इन्तेजाम स्कूल मैनेजमेंट ने ही किया है .. जिस से बच्चे आपस में घुल मिल सकें और एक दूसरे को जन सकें .. जिस से उनमें खेल भावना जागृत हो ... हम दोनों ह्म्म्म स्वर निकला ....!!!

चाय पीने के बाद सर ने मुझसे पूछा कि अगर तुम प्रक्टिस करना चाहती हो तो में तुम्हे ले चलता हूँ साथ में दोनों मिलके प्रक्टिस कर लेना .. वहां और बच्चे भी होंगे .. और तुम्हारी ट्यूनिंग भी सेट हो जायेगी .. ..!!!

मैंने सर से कहा सर अब तो आ गई हूँ .... न भी चाहूँ तो भी खेलना ही पड़ेगा .. अब जो होगा देखा जाएगा .. ये तो आपको मुझे लाने से पहले सोचना चाहिए था. सर कहते तुम नहीं जाना चाहती वो दूसरी बात है ... चलो तुम दोनों जा के रेस्ट करो .. थक गए होंगे लंबे सफर में ..

वरुण उठने लगा .. मैंने सर से कहा .. सर इसे समझा लो .. जब देखो मुंह सड़ाये रखता है अब यहाँ कोई और है भी तो नहीं जिस से मैं बात कर सकूँ ।

सर कहते वरुण इसका ख्याल रखो और हाँ जो कहती है सुन लिया करो .. कम से कम सिर्फ़ कहती ही है न .. बीवी की तरह बेलन थोड़े ही मारती है ..!! सर मुस्कुराते हुए बोले ..!!!

इसके जवाब मैं वरुण बोला .. सर हम तो बेलन खाने को भी तैयार हैं पर मरने वाली तो आये ...!!! और हंस पड़ा ...

फ़िर हम दोनों अपने कमरे की तरफ़ चले गए .. जा ही रहे थे कि सर ने पीछे से वरुण को आवाज लगाई .. "कोई तकलीफ हो तो .. मुझे इंटर कॉम से कॉल कर लेना ..और हाँ तुम्हे याद है ना मैंने क्या कहा था .."

वरुण ने उन्हें आश्वस्त करते हुए हाँ मैं सर हिलाया ..!!

हमारे कमरे में आते ही वरुण भड़कते हुए बोला .. कमसे काम मोका देख के तो बोल लिया करो की क्या बोल रही हो ...क्या जरूरत थी ये कहने की सर से .. ये हम दोनों के बीच की बात है ओरों को हमारे बीच मैं क्यूँ लाती हो ..

मुझे अच्छा लगा कि उसने मुझे अपने मन की डांट लगायी .. और हम दोनों के झगडे को अपनी पर्सनल बात मानी और सार्वजनिक करने से मना किया।

मैंने उस से कहा .. अगर यही बात पहले आपके होठों से फूट पड़ती तो मुझे गैरों से आपको सिले हुए होंठो को खुलवाना ना पड़ता ....

बस इतना कहने की देर थी उसने कहा .. कृति यू आर टू मच .. यू आर जस्ट इम्पोस्सिब्ल ..!!!

तुम्हारे साथ रहना तो दूर , बात करना ही बेकार है ...

उसके बात ख़तम होने से पहले ही मैंने उसे कहा - सो यू डू ..!!

(जाने क्यूँ हम दोनों के दिल में एक दूसरे के लिए बे-इन्तहां प्यार होते हुए भी हमारा ज्यादातर वक्त झगडों और लडाइयों में गुजरता था )

ये सब सुनने के बाद .. वो बिस्तर पर खिड़की की ओर करवट लेके सो गया ... ठीक दो घंटे बाद दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी .. मैंने खोलने से पहले अंदर से पूछा .. वो सर थे ... मैंने दरवाजा खोला .. और सर अंदर आये मैंने सर को बैठने के लिए कुर्सी दी ... सर वरुण की तरफ़ देख के बोले .. इसे क्या हुआ .. मैंने कहा सर .. इसे कुछ हो भी नहीं सकता .. कुम्भकरण की इस छटी पुश्त को कहाँ से उठा के लाये हो ... जब से आया है सो ही रहा है ...पिछले दो घंटे से देख रही हूँ .. इस मनहूस टीवी पे भी तो न्यूज़ के अलावा कुछ और नहीं आता .. और फ़िर इन्सान एक दिन की अखबार कितनी बार पढ लेगा।

सर ने कहा तुम इतना ही बोरे हो रही हो तो मेरे साथ चलो मैं डिनर के लिए स्कूल कम्पाउंड में जा रहा हूँ ..(मुझे सर से ज्यादा वरुण पे भरोसा था .. इसीलिए मैंने जाने से मना कर दिया) मैंने कहा- नहीं सर मुझे भूख नहीं है, शाम को पकोड़े कुछ ज्यादा ही हो गए थे, अगर पेट ख़राब हो गया तो सुबह खेलना मुश्किल हो जाएगा .. और वैसे भी मैं भी सोने की ही तैयारी कर रही थी .. सर कहते- ठीक है जैसा तुम ठीक समझो .. पर हाँ कल सुबह ८ बजे नीचे मुख्य हॉल में पहुँच जाना .. ९ बजे तुम दोनों का मैच है चंडीगढ़ के साथ ..!! सर ने मुझे गुड नाईट किया

.. और सर के जाने के बाद में अपने बिस्तर पे लैंप जला के अपना नोवेल पढने लगी ...पर थोड़ी थोड़ी देर बाद मुझे उसे देखने की इच्छा होती .. जाने मुझे क्या हो रहा था .... वो इतना पास होते भी मुझे ख़ुद से दूर जाता हुआ महसूस हो रहा था .. पर मैं उसे चाहकर भी रोक नहीं पा रही थी ..आँखों में उसे देखने की प्यास थी की ख़तम होने का नाम नहीं ले रही थी .. रात के ११ बज चुके थे .. और मैं सोने की नाकाम कोशिश कर रही थी .. परेशां थी .. ख़ुद से या उस से पता नहीं ..!!

बिस्तर पर उठ के बैठी ..तो देखा कि .. खिड़की से आती चाँद कि चंचल चांदनी परदे से छन छन के उसके चेहरे पे पड़ रही है .. उसके रेशमी धागों से बाल उसकी आँखों पे थे .. मैंने खिड़की के पास पड़ी कुर्सी उठाई और उसके चेहरे के ठीक आगे कुर्सी लगा के बैठे बैठे उसे निहारने लगी ..कुछ भी कहो .. उसे जितना देखती थी .. उसे और देखने कि इच्छा होती थी .. मैं उसके मोह जाल मैं फंसती जा रही थी. उसकी दांई हथेली उसके दांए गाल के नीचे ऐसे लग रही थी जैसे पत्ते पर ओस की पहली बूंद होती है…इतनी सौम्य कि बस देखते रहने का मन कर रहा था और वो इतने भोलेपन से सो रहा था जैसे बच्चा अपनी मां की गोद में सिर रख के सोता है…दुनिया से बेखबर, एकदम निश्चिन्त होके।

उसका बायां हाथ उसके दाएं हाथ के नीचे रखा था और उसकी टांगें सुकड़ी हुई थीं… उसे पंखे की हवा में भी ठण्ड लग रही थी शायद ! मैंने उसे अपनी चादर औढा दी।

उसके रेशम से बाल कभी उसके माथे को चूमते तो कभी उसकी आंखों को हल्के से सहला के चले जाते, मानो उसकी आंखों में सपने भर रहे हों !!

यूं ही देखते देखतेवक्त गुज़र गया, सुबह के चार बज गए, पता ही नहीं चला…!!! इस से पहले वो जागता, मैंने कुर्सी वापिस उसी जगह रख दी जहां पड़ी थी और खिड़की के पास जा के खड़ी हो गई क्योंकि नींद तो मुझे आने वाली थी नहीं… और फ़िर आए भी क्यूं… मैं अपनी जिन्दगी के कुछ यादगार लम्हें गुजार रही थी जिन्हें शायद ही मैं कभी भूल पाऊंगी…!!!

धीरे धीरे रात की कालिमा को भोर के उज़ियारे ने धो दिया। आसमान में चिड़ियां गश्त लगाने लगी थी, पन्छी हर तरफ़ गाने लगे थे, मानो सभी को उठने का संदेश दे रहे हों… और सबको शुभ-प्रभात कह रहे हो ! तकरीबन साढे पांच बजे वो आंखें मलता हुआ उठा- अरे तुम तो काफ़ी जल्दी उठ गई… मुझे लगा कि अब तक तुम सो रही होगी !

तो मैंने कहा,"कुछ मूर्ख लोग होते हैं जो वक्त को इस तरह सो के बरबाद कर देते हैं पर मैं उन में से नहीं हूं…!!!

कहता- तुम सोई नहीं क्या…

मैंने आश्चर्यचकित होते हुए कहा- हैं…???

वो फ़िर बोला- तुम्हारी आंखें क्यों सूजी हुई हैं, रो रही थी क्या?!?!

मैंने कहा- आंसू पौंछने वाला अगर कोई होता तो शायद जरूर रोती… सहारा देने वाला होता तो शायद ठोकर खाकर जरूर गिरती… कोई हाथ थामने वाला होता तो शायद जरूर बहकती… पर अफ़सोस ऐसा कोई नहीं है…!!!

वो आंखें झुका के सब सुन ध्यान से रहा था.. खड़े होके मेरे पास आया..कन्धे पे हाथ रखके उसने मुझ से पूछा- क्या बात है?..सुबह सुबह शेर-ओ-शायरी ! क्या हुआ मेरी स्वीटी को…इतनी सेन्टी क्यूं हो?? किसी की याद आ गई क्या???

मैंने उसे कहा- याद उसकी आती है जो दूर हो... कोई है जो सब कुछ देखके भी आंखें बंद कर लेता है, सुन कर भी अनसुना कर देता है। वो हर वक्त मेरे पास होता है...पर मेरे साथ नहीं होता... पर पता नहीं मैं भी उसके इतने ही करीब हूँ या नहीं ...

उसने मुझे दिलासा देते हुए कहा .. कोई पागल ही होगा जो तुमसे प्यार करना नहीं चाहेगा .. तुम उसे कह के तो देखो शायद कुछ हो जाए ..

मैंने कहा .. उसे कहने से कुछ फायदा नहीं उस बेदर्द में दिल ही नहीं है .. दिल होता तो शायद अब तक समझ जाता ... (उसे अब तक पता नहीं चला था कि मैं उसी की बात कर रही थी .. इडियट कहीं का )

उसने कहा .. और ऐसा भी तो हो सकता है कि वो सब कुछ समझता हो, जानता हो.. वो सब कुछ तुम्हारी आँखों में पढ़ लेता हो, पर शायद तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता हो .. शायद उसे लगता हो कि अगर वो कहेगा तो कहीं तुम उसे मना न कर दो .. कहीं उसे ये डर न हो कि उसकी इगो हर्ट हो जायेगी ... उसके शब्द सुन के मेरी आंखें भर आई .. क्यूंकि बस में जिसने मेरे दिल को इतनी चोट पहुंचाई .. क्या ये वरुण वही इन्सान था जो तब मुझसे इतने प्यार से बात कर रहा था ...

मैं उसे तब भी कुछ नहीं कह सकी. . बस उसकी आँखों में झांकती रही और कब आखों से आंसू छलक गए पता भी नहीं चला .. उसने कंधे से हाथ हटा के मेरे आंसू पौंछे और मेरे सर पर अपना हाथ रख दिया .. उसने कहा .. थोड़े आंसू बचा लो .. तुम लड़कियों के पास एक यही तो हथियार है ... उसे बर्बाद मत ।करो .. और हाँ थोड़े इसीलिए बचा के रखा करो क्यूंकि ये अनमोल हैं. और मैं तुम्हे रोते हुए नहीं देख सकता ...

मुझे चुप कराने के बाद उसने कहा मैं मोर्निंग वाक् पे जा रहा हूँ, चलोगी ?.. थोडी फ्रेश भी हो जोगी .. और थोड़ा वार्म अप भी कर लोगी .. लेग्स की मस्सल्स भी खुल जाएँगी .. और तुम्हे खेलते वक्त दिक्कत भी नहीं होगी ..मुझे उसकी बात ठीक लगी और मैं उसके साथ ट्रैक सुइट पहन कर मोर्निंग वाक् पे चली गई।

वापिस आकर हम दोनों फ्रेश हुए अपने स्पोर्ट्स ड्रेस पहने और अपने अपने बल्ले ले के नीचे हॉल मैं चले गए .. जहाँ सर नाश्ता कर रहे थे ...हमारे पहुँचते ही सर ने कहा- अरे आ गए तुम दोनों .. वैरी गुड ! वरुण ने व्हाइट शोर्ट्स और टी -शर्ट पहनी थी .. और सर पे हेयर-बैंड था ताकि बाल खेलते वक्त उसकी आखों में ना आयें ... मैंने चोटी बनाई थी .. एक व्हाइट टी -शर्ट और व्हाइट मिनी स्कर्ट पहनी थी ..हाँ इस बार वरुण ने मेरी स्कर्ट को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई .. क्यूंकि उसे मालूम था टेनिस में कभी कभी एक और से दूसरी और तेज़ और बड़े क़दमों से भागना पड़ता है .. जो कि लम्बी स्कर्ट में नहीं किया जा सकता ..

हम दोनों तैयार थे। नाश्ते में हमने एक एक ग्लास ओरंज़ जूस और कुछ फल लिए ..और पहुँच गए गेम वेन्यु पर ..९ बजे खेल शुरू होना था .. हमारी प्रतिद्वंदी टीम चंडीगढ़ के स्कूल की थी। लड़की सुंदर थी (ज्यादातर सरदारनियाँ सुंदर होती हैं ) उसके नैन नक्श एक दम टिपिकल सरदारनियों जैसे थे और लड़का सरदार था। हमारा खेल शुरू हुआ, हम दोनों को शुरू में तालमेल की वजह से कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा, पर ब्रेक में वरुण ने मुझे उसके साथ खेलने के कुछ टिप्स सिखाये और नेक्स्ट हाफ में हमने बहुत अच्छा किया और हम मैच जीत गए। १२ बजे खेल ख़तम हुआ। ये हमारा क्वाटर फाईनल था।

इसके बाद हमें सेमी फाइनल में जयपुर के स्कूल की टीम के साथ खेलना था और वो मैच उसी दिन २ बजे होना था। मुकाबला कड़ा था। खेल शुरू होने से पहले हम दोनों ने एक दूसरे को बेस्ट ऑफ़ लक कहा और कड़ी मेहनत के बाद हम वो गेम ६ -४, ५ -४, ६ -५ से जीत गए। गेम ४.३० बजे ख़तम हुआ। निकलते समय मैंने दूसरी टीम की लड़की से हाथ मिलाया और वरुण ने लड़के से .. उसके बाद वरुण ने लड़की से मिलाया और मैंने लड़के से।

सामने वाली टीम के लड़के ने मुझसे हाथ मिलते वक्त कहा कि मैं ये मैच जीत जाता अगर तुम न खेल रही होती, मेरा सारा ध्यान तो तुम्हारी टांगों पर था, सच कहूँ युअर लेग्स आर सो स्टन्निंग .. ये सुनने के बाद मैंने सीधा वरुण के चेहरे पे देखा, उसने बात सुनी थी पर उसने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दिखाई, हाथ छुड़ाने पर मुझे अपने हाथ मैं एक पर्ची मिली, जो हाथ मिलाते वक्त उस लड़के ने मेरे हाथ पे रखी थी, उसपे लिखा था .. "७ बजे शाम को इसी मैदान की पार्किंग में मिलो.!!!!"

हम सर के साथ वापिस होटल आ गए। उस वक्त ५ .३० बजे थे। सर हमारी बहुत तारीफ़ कर रहे थे, पर मैं अपने मन में यही सोच रही थी कि अभी डेड़ घंटा बाकी है। हम दोनों कमरे में गए, और मैंने वो स्लिप मेज़ पे रख दी। पहले वरुण फ्रेश हो के बाहर आया, और मैं फ्रेश होने बाथ रूम में चली गई। मैं नहा ही रही थी, मुझे लगा कि कमरे का दरवाजा खुला है। मैंने वरुण को अंदर से ही आवाज़ लगाई पर कोई जवाब नहीं मिला। जल्दी जल्दी में मैंने नहाना धोना ख़तम किया और कपड़े पहन के बाहर आई। ६.४५ हुए थे, मुझे पता था वरुण कहाँ गया है।

मैं भी उसके पीछे पीछे चल दी। वहां पहुँच के मैंने सिर्फ़ इतना देखा कि वरुण पार्किंग से बाहर आ रहा है, मैं छुप गई और उसके जाने के बाद मैं पार्किंग में गई। वहां वो लड़का एक गाड़ी के पीछे जख्मी पड़ा था। वरुण ने उसे बहुत मारा था, मेरे पहुँचते ही वो रो रो के सॉरी मैडम, सॉरी दीदी कहने लगा और तो और पाँव छूने लगा।

उसने मुझसे कराहती हुई आवाज़ में कहा- वो आपका भाई है क्या? मैंने कहा- नहीं! उसने फ़िर से पूछा- प्रेमी ??? मैंने कहा नहीं ! हम दोनों का रिश्ता इन सब रिश्तों से ऊपर है .. वो तुम नहीं समझोगे .. आज जो तुमने गलती की .. दोबारा किसी के साथ मत करना .. ये कह के मैं वहां से निकल गई .. निकलते समय मैंने ...ग्राउंड की अथॉरिटी को इन्फोर्म किया कि पार्किंग मैं कोई लड़का जख्मी पड़ा है और उसे फर्स्ट ऐड की जरूरत है।

उसके बाद मैं होटल पहुँची, करीबन ७ .३० बजे। उसने आते ही पूछा- कहाँ गई थी? मैंने कहा- जहाँ तुम गए थे! कहता- मैं तो कहीं नहीं गया, यहीं था, थोड़ी देर के लिए सर के कमरे में गया था, लौटा तो देखा तुम कमरे में नहीं हो।

मैंने कहा," जब तुम्हे झूठ बोलना आता नहीं तो बोलते क्यूँ हो ... क्यूँ मारा तुमने उस लड़के को ..." वरुण कहने लगा .."किस लड़के को .. तुम किसकी बात कर रही हो .. "

मैं चुप हो गई मैं उसके जख्मों को कुरेदना नहीं चाहती थी .. और न ही दोबारा झगड़ा करना चाहती थी .. हम दोनों बहुत थक गए थे .. और आज भी कल ही की तरह बिना खाए पिए सो गए .. और उस दिन मुझे चैन की नींद आई .. क्यूंकि मैं आश्वस्त हो चुकी थी की वरुण के दिल में भी मेरे लिए कुछ न कुछ तो जरूर है ...

सुबह १० बजे हमारा फाइनल था मुंबई टीम के साथ .. मैं जल्दी उठ गई .. आज का दिन मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था .. इसलिए नहा धोकर पूजा की .. तब तक वरुण भी उठ गया .. रोज़ की तरह आज फ़िर से वो मोर्निंग वाक् पे गया ..जाने से पहले उसने मुझसे पूछा ..पर मैंने ही मना कर दिया .. क्यूंकि कमरे पर और भी काम थे करने को .. पैकिंग करनी थी .. चेक आउट करना था ...

जब वो मोर्निंग वाक् से आया तब तक मैं दोनो बिस्तर ठीक कर चुकी थी, हम दोनों के बैग पैक कर चुकी थी उसके पहनने वाले कपड़े निकाल के रख दिए थे (बिल्कुल बीवियों की तरह ) आने के बाद उसने पूछा- अरे! ये कमरा इतना व्यवस्थित कैसे हो गया? मैंने कहा- मैंने किया और कौन करेगा? कहता- तुम कबसे इस होटल की सफाई कर्मचारी बन गई .... और यह कहके हंसने लगा ... मैंने भी उसकी बैटन को मजाक मैं लेते हुए कहा .. जब से तुम जमादार बने हो तभी से ...

मैं उसके आने तक तैयार हो चुकी थी, आने के बाद वो भी नहा धो के तैयार हो गया, हम दोनों अपने अपने बैग ले के नीचे पहुंचे। सर हमारा इंतजार कर रहे थे। हम तीनों ने रजिस्टर पर चेक आउट करने के लिए हस्ताक्षर किए और सामान उठा के स्टेडियम चले गए। वहां लॉकर में सामान रख दिया। तब तक ९ .४५ हो चुके थे, मैच शुरू होने में सिर्फ़ १५ मिनट बाकी थे।

मैच शुरू हुआ। मुंबई टीम का लड़का बेहद स्मार्ट था, और लड़की सांवली सी थी लेकिन उसके फीचर बहुत अच्छे थे। उनकी टीम बहुत अच्छे खेल के प्रदर्शन के बाद यहाँ तक पहुँची थी। मैं बहुत नर्वस थी (ऐसे मौकों पर मैं अक्सर नर्वस हो जाया करती हूँ ) मुझे ख़ुद पे भरोसा नहीं था कि मैं इन्हे चुनौती दे भी पाऊँगी या नहीं, पर वरुण पे भरोसा था ...उनकी टीम ने हमारा खेल पिछले दो मैचों में देखा था।

खैर पहला सेट हम जीत गए, पर दूसरा सेट शुरू होने के साथ बाल बार बार मेरी तरफ़ ही आ रही थी और वरुण बार बार भाग कर बाल अपने बल्ले पर ले रहा था। वो जानता था कि मैं कांफिडेंट नहीं हूँ और ये बात सामने वाली टीम को भी पता थी। इसीलिए वो हमारी कमजोरी का फायदा उठा रहे थे। आखिर कार वही हुआ जिसका डर था- वरुण भी आखिर कब तक अकेले मोर्चा संभालता, वो भी इन्सान है उसे भी थकन होती है, नतीजतन हम दूसरा सेट हार गए और फ़िर एक के बाद एक तीसरा और चौथा भी ..

हम मैच हार गए ..

और सब कुछ हुआ मेरे कारण .. जब ये बात मैंने वरुण से कही .. तो उसने कहा हम मैच तुम्हारी वजह से नहीं हारे .. हम मैच इसलिए हारे क्यूंकि .. मेरी प्रक्टिस वंशिका के साथ हुई थी, तुम्हारे साथ नहीं, ऐसे में दिक्कतें तो आती ही हैं। सर ने भी मुझे दिलासा देते हुए कहा- कोई बात नहीं बेटे ! तुम तीन में से २ मैच तो जीते न, ये मत देखो कि तुम आखिर में हारे या जीते .. तुम ये देखो कि तुमने खेल भावना से खेले या नहीं .. अगर हाँ तो तुम हारने के बावजूद जीत गए क्यूंकि इस से तुम्हे बहुत कुछ सीखने को मिला और फ़िर हर हार के बाद कोई कुछ न कुछ तो सीखता ही है, तुमने भी सीखा ही होगा .

जब तक खेल में कोई हारेगा नहीं तो सामने वाला जीतेगा कैसे ...!! सर की बातों ने मुझ पे और मेरे मूड पे काफी असर किया .. उसके बाद हमने कुछ रेफ्रेश्मेंट्स ली और थोड़ी देर आराम करने के बाद हम वहां से २ बजे निकल पड़े बस लेने के लिए। बसों की हड़ताल थी इसलिए हमें टैक्सी करनी पड़ी। सर साथ में थे इसलिए रास्ते भर हमने ज्यादा बातचीत नहीं की और सर ने मुझे करीबन ७ बजे और वरुण को मेरे बाद टैक्सी से ही हमारे घर छोड़ा।

इस एक्सपेरिएंस के बाद मुझे तो पूरा यकीन हो गया भले वरुण बाहर से दिखाता न हो .. पर उसके मन में एक सॉफ्ट कार्नर जरूर है मेरे लिए .. शायद इसलिए क्यूंकि .. मैं उसकी सबसे करीबी और अच्छी दोस्त थी .. या फ़िर शायद कुछ और ...

ये आपको मेरी आगे वाली कहानियो में पता चलेगा ... कि उसके दिल में आखिर क्या था .. और वो मुझ से दूर जाने की कोशिश क्यूँ करता था …. आपको .. मेरी यह कहानी कैसी लगी मुझे अपने विचार केवल और केवल ईमेल के ज़रिये भेजें .. मुझे आपके फीड बैक का इंतज़ार रहेगा ..

मेरी मेरे पाठकों से तहे दिल से गुजारिश है कि वो मुझसे केवल कहानी से जुड़े सवाल ही करें .... अश्लील सवालों के उत्तर नहीं दिए जायेंगे ..

पाठको से ये भी अनुरोध है कि आप अपनी लेखिका कि मजबूरी को समझ कर निजी से ज़िन्दगी से जुड़े सवाल भी न करें ... मैंने वरुण और अपनी कहानी अन्तर्वासना पर भेजने से पहले वरुण से ये वायदा किया है कि .. मैं अपनी से जीवन से जुड़ी कोई बात यहाँ नहीं लिखूंगी .. जैसे कि मेरा नाम, शहर, मेरी उमर, मेरी फिगर .. इसलिए आपसे अनुरोध है कि ऐसे सवाल न करें जिनका मैं जवाब न दे सकूँ ...

कहानी पढने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ...

हेल्थ क्लब की आन्टी ने घर बुलाया

प्रेषक : पृथ्वी

मैं एक क्लब रिसॉर्ट में रिसेप्शन पर काम करता हूं। मेरी उम्र २९ साल है। हमारे यहाँ रूम भी है और हेल्थ क्लब भी है। हमारे यहाँ बहुत सी लड़कियां कसरत करने आती हैं और मैं उनको रोज देखता हूं। किसी के बोब्श बड़े हैं तो किसी की गांड देख के मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है। मैं सोचता रहता हूं कि किस दिन ऐसी प्यारी आंटी चोदने को मिलेगी लेकिन वो दिन आ गया।

एक दिन एक आंटी मेरे पास आई और कहा कि आप का फोन नम्बर हमें दो, हमें काम है और फ़िर पूछा कि आप कब फ्री होगे? हमने हमारा ओफ़िस टाइम बताया। फ़िर वो चली गई। मैं उनके बारे में सोचने लगा कि ऐसा क्या काम होगा। दो दिन बीत गए, वो सुबह एरोबिक में भी नही आ रही थी और थोड़े दिनों के बाद अचानक उनका फोन आया कि मैं कामिनी बोल रही हूं। मैं आप के वहां रोज सुबह आती थी, मैंने आप से आप का फ़ोन नम्बर लिया था।

हां ! हमने कहा- हां ! बताओ मैडम क्या काम था?

स्कूल में मस्ती-२

प्रेषक : दीपक

हाय ! मैं दीपक, आपने मेरी कहानी स्कूल में मस्ती का पहला भाग पढ़ा और मुझे मेल भेजे!

शुक्रिया !

अब अगला भाग :-

मै फ़िर से निधि को चोदने का अवसर ढूंढने लगा. स्कूल में नए साल की पार्टी थी. कार्यक्रम ७.३० शाम को था. सभी लड़के, लड़कियां ७ बजे से आने शुरू हो गए थे. मैं बेसब्री से निधि का इंतजार कर रहा था. वो ८ बजे अपनी सहेली के साथ आई, उसने नीले रंग की जींस और लाल रंग की टी शर्ट पहन रखी थी, जिसमें वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी लग रही थी. मैं देखता ही रह गया. उसकी तनी हुई चूचियां देख मेरा लंड पैंट के अंदर ही नाग की तरह फुफकारने लगा.

पार्टी देर तक चलने वाली थी तो मैं बाहर जाकर ड्रिंक कर आया. आते ही निधि को ढूंढने लगा. वो अपनी सहेलियों के साथ डांस कर रही थी. मैंने इशारे से उसे अपने पास बुलाया. थोडी देर में वो मेरे पास आई तो मैंने उसे कहा कि आज मैं तुम्हे फ़िर चोदूंगा.

दिल्ली काल बोय की चुदाई-2

हेल्लो रीडर्स!

हाउ आर यू ,

मैं लक्ष्य हूँ दिल्ली से ! आई ऍम अ काल बॉय. मैं फ़िर आपको अपना नया अनुभव सुनाने आया हूं।

मेरी पिछली कहानी पढने के बाद कई लोगों ने मुझे ई-मेल भेजे, जिनमें एक दिल्ली की ही एक लड़की का था। उसने अपना फ़ोन नम्बर दिया हुआ था। मैंने उसे फ़ोन किया ओर बताया तो उसने कहा कि वो देहरादून की रहने वाली है और नोयडा में जोब करती है और लक्ष्मीनगर में रहती है।

तो मैंने उसे बताया कि मैं भी नजदीक ही मयूर विहार में रहता हूँ जब भी उसे सर्विस चाहिए तो मुझे मेल कर बुला सकती है तो उसने मुझे सन्डे को अपने फ्लैट पर आने के लिए कहा.

मेरी पड़ोसन आंटी-२

प्रेषिका : प्रतिभा शर्मा

दोस्तों ! पिछले भाग में अपने पढ़ा कि आंटी ने किस तरह मुझसे चुदाई करवाई. अब आप आगे की दास्ताँ सुनिए :

एक बार चुदाई का खेल खेलने के बाद आंटी और मेरी प्यास ज्यादा बढ़ गई. लेकिन दो तीन दिनों तक हमें कोई मौका नहीं मिला. दो तीन दिन बाद एक दिन सुबह सुबह मैं कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रहा था कि अचानक आंटी मेरे कमरे में आ गयीं. मैं उस समय नहा कर निकला था इसलिए मेरे बदन पर केवल अंडरवियर ही था. अन्दर आते ही आँटी ने मेरे अंडरवियर में हाथ डाल कर मेरा मुरझाया हुआ लंड निकाल लिया और मुंह में भर लिया. आँटी के मुंह में जाते ही मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया. थोड़ी देर मेरा लण्ड चूसने के बाद आँटी अलग हो गयीं और अपने बड़े बड़े बूब्स के बीच में हाथ डाल कर दो गोलियां निकाली और मेरे हाथ पर रखते हुए बोलीं “पप्पू ये गोली खाना खाने के बाद एक अभी और एक शाम को ले लेना. तुम्हारे अंकल की आज रात की पारी है मैं तुझे रात को ११ बजे रोशनी बन्द करके इशारा कर दूँगी तू तैयार रहना. आज तुझे नया खेल सिखाऊंगी.” इतना कह कर आँटी जल्दी से मेरे कमरे से बाहर चली गयीं और मेरी मॉम से बातें करने लगी.

डॉक्टर मेरी गुरुआनी

प्रेषक – नीरज गुप्ता

यह एक ऐसी कहानी है जिसने मेरी दिमाग की खिड़कियाँ खोल के सेक्स की बहुत सी बारीकियाँ सिखा दी.

मैं जयपुर का रहने वाला हूँ मेरा नाम नीरज गुप्ता है. मेरी लम्बाई ६ फुट और कमर का नाप उस समय २८ इंच था जब की ये कहानी है. दिखने में ऊपर वाले की मेहरबानी से लड़कियों की नज़र चिपकाने लायक चेहरा और बदन है. जवानी की दहलीज़ पे कदम चढ़ने के बाद, लगभग २० साल की उम्र रही होगी।

मैंने लण्ड की सार संभाल ठीक से करने के लिए नहाते समय लण्ड की मालिश सरसों के तेल से करनी शुरू कर दी. तेल बहुत तेज लगता था लेकिन थोडी देर सहन कर लेता था. लेकिन इसका नुकसान ये हुआ कि लण्ड का सुपाडा थोड़ा लाल हो गया और थोड़ा दर्द होने लग गया. ये देख के मुझे थोडी घबराहट हुई. मैंने अपने सर्किल में पूछताछ कि तो किसी ने मुझे बताया कि पास की कालोनी में हमारे घर से लगभग एक किलोमीटर दूर बड़े अस्पताल के स्किन रोग विशेषज्ञ रहते है उनको दिखा दू, अच्छे डॉक्टर है. शाम को ५ से ७ बजे तक देखते हैं

नेपालन घरेलू कामवाली

हाय दोस्तों

यह मेरा पहला मौका है अन्तर्वासना को कहानी भेजने का, आशा है कि आपको पसंद आयेगी.

मैं अभी अहमदाबाद में रहता हूं. बात ३ साल पहले की है, हमारा एक छोटा सा घर है, लेकिन मैं तो बड़े ठाट-बाट से रहता हूं. एक बार मैं और मेरा परिवार सब साथ में बैठे थे। हमारा एक नौकर था जिसका नाम पेमजी था। पापा ने कहा कि घर का काम करने के लिए एक औरत की जरुरत है, तो पेमजी ने कहा कि मेरे गांव में एक नेपाली है, उसका पति उसको छोड़ के भाग गया है, तो पापा ने कहा उसको यहाँ ले आ।

अगले दिन वह उसको लेने चला गया। शाम तक वह उसको ले के आ गया। हम सब वहीं बैठे थे। वो कसम से इतनी सुंदर थी आप तो जानते ही हो कि नेपाली कितने सुंदर होते हैं। तो पापा ने उससे थोड़ी पूछ ताछ की, फ़िर उस दिन से वह हमारे यहाँ काम करने लगी. मेरा तो मन उस पर आ ही गया था, अब तो मैं बस समय का इंतजार कर रहा था।

उसका नाम रेनू था. उसकी उम्र ३२ के आसपास होगी लेकिन अगर आप उसके ब्रेस्ट देखो तो आपका भी खड़ा हो जाए। वह उनको अपने ब्लाउज में छुपा भी नहीं पाती थी। उसको अपनी साड़ी का पल्लू उस पर ढकना पड़ता था. एक बार रात को सब सो गए, फ़िर मैंने सोचा कि शुरुआत तो करनी ही पड़ेगी।

मैं धीरे से खांसा तो उसकी नींद नही खुली. मैंने सोचा कि अब क्या करू? मैं थोड़ा तेज खांसा. फ़िर उसकी नींद खुल गई, उसको हम हमारे कमरे में ही सुलाते थे। मैं, मेरी दादी और रेनू हम तीन एक कमरे में सोते थे और पापा मम्मी अलग कमरे में सोते थे। मैंने एक बार और खांसा तो वो उठी और मेरे लिए पानी लेकर आई। मैं पानी पीते हुए उसके बूब्स को देख रहा था तो उसने मुझे देख लिया. उसने अपनी साड़ी का पल्लू उस पर ढक लिया. मैंने तुंरत उसके सामने देखा, मुझे हंसी आ गई वह भी हलके से मुस्कुरा दी। फ़िर वह सो गई मेरा हाथ तो मेरे लंड पर था सोच रहा था कि उसकी चूत के दर्शन कब होंगे।

एक हसीना की पहली चुदाई

प्रेषक : पृथ्वी

मैंने आप की सारी कहानी पढ़ी है और यह एक अच्छा जरिया है सबको अपना अनुभव कहने का।

मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं और मेरी उम्र ३० साल है। मैं शादी।शुदा हूं और मेरे दो लड़के भी हैं।

मैं बचपन से ही सेक्स का शोकीन हूं। मेरे बड़े भाई मुझे अक्सर कहा करते हैं कि जब मैं छोटा था १ साल का, तब से लड़कियां मुझसे ज्यादा ही इंटरेक्ट करती थी। मुझे तो वो सब याद नही है लेकिन शादी से पहले मैंने ६४ लड़कियों से प्यार किया है ३६ लड़कियो से सेक्स किया है।

लेकिन अभी ६ महीने पहले की एक कहानी बताता हूं !

रीना की भाभी मोना

मैं २६ साल का लड़का हूं। ये मेरी दूसरी कहानी है।

उस दिन बारिश में रीना और अंजली को चोदने के बाद मैं घर चला गया और अगले दिन रीना का फोन आया। उसने कहा कि मुझे आप के साथ बहुत मज़ा आया और मेरी भाभी आप से चुदवाना चाहती है। तो क्या आप मेरी भाभी को चोद देंगे तो वो आप को २०००/- रुपये देगी। मैने झट से हां कर दी और उसके बताये हुए पते पर २ बजे दोपहर पहुंच गया। वो भी एक आलीशान कोठी थी मैने जैसे ही डोरबेल बजाई पहले रीना ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर बुलाकर सोफ़े पर बिठाया और उसने उसकी भाभी को पानी के लिये आवाज़ लगायी। तो उसकी भाभी जैसे ही पानी लेके आयी मैं तो उसे देखते ही खड़ा हो गया। क्या मस्त जवान, गोरी, सुन्दर और बड़े बूब्स वाली औरत थी। फिर रीना ने कहा कि राजेश ये मेरी भाभी मोना है तो आप दोनो एन्जॉय करो मैं चलती हूं और रीना उठकर चली गयी फिर मोना मुझे अपने बेडरूम में ले गयी।

मेरी सहेली-१

प्रेषिका : कामिनी सक्सेना

सहयोगी : रीता शर्मा

मैं और कामिनी बचपन की सहेलियां है. हम स्कूल से लेकर कॉलेज तक साथ साथ पढ़े. और अब मेरी और कामिनी की शादी भी लगभग एक ही साथ हुयी थी. मेरा घर और उसका घर पास में था. कामिनी का पति बहुत ही सुंदर और अच्छे शरीर का मालिक था. मेरा दिल उस पर शुरू से ही था. मैं उस से कभी कभी सेक्सी मजाक भी कर लेती थी. वो भी इशारों में कुछ बोलता था जो मुझे समझ में नहीं आता था. कामिनी भी मेरे पति पर लाइन मारती थी ये मैं जानती थी. जब हमारे पति नहीं होते तो हम दोनों साथ ही रहते थे.

उन दोनों के ऑफिस चले जाने के बाद मैं कामिनी के घर चली जाती थी. कामिनी आज कुछ सेक्सी मूड में थी.

मैंने कामिनी से कहा - "आज चाय नहीं..कोल्ड ड्रिंक लेंगे यार."

"हाँ हाँ क्यों नहीं..."

हम सोफे पर बैठ गए. कामिनी मुझसे बोली- "सुन एक बात कहूं...बुरा तो नहीं मानेगी..."

"कहो तो सही.."

"देख बुरा लगे तो सॉरी...ठीक है ना..."

"अरे कहो तो सही..."

"कहना नहीं....करना है..."

"तो करो......बताओ.." मैं हंस पड़ी.

रूही की चुदाई

प्रेषक : संदीप नैन

मेरा नाम सुनील है। मैंने अभी अपनी इंजीनियरिंग पूरी की है। मैं अब एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करता हूँ। जहाँ मैं काम करता हूँ वहाँ एक से एक लड़कियां आती हैं। मैं दिखने में बहुत आकर्षक हूँ, मैं जिम जाता हूँ इसलिए बढ़िया तंदुरुस्त शरीर बहुत ही आकर्षक है इसलिए ज्यादातर लड़कियां मेरी तरफ़ आकर्षित हो जाती हैं।

मेरी कंपनी में एक बहुत ही सुंदर लड़की है जो मुझे अक्सर देखा करती थी। लेकिन मैं उससे ज्यादा भाव नहीं देता था। ऑफिस में मेरी सीट बहुत ही बढ़िया जगह पर थी, एकदम गर्ल्स टॉयलेट के सामने, इसलिए कई बार आती जाती लड़कियां मुझे देख कर मुस्कुरा देती थी क्यूंकि मेरी नज़रें बहुत कुछ बयान करती थी।

एक दिन जब मैं ऑफिस से छुटी के वक्त जा रहा था अपनी गाड़ी में, तो अचानक उसी लड़की ने मुझे लिफ्ट के लिए हाथ दिया। मैंने भी ताव में आकर गाड़ी रोक दी।

उसने कहा- आप मुझे मेट्रो स्टेशन तक छोड़ सकते हैं मैं बहुत जल्दी में हूँ।

मैंने कहा- ओके सिट ! वो मेरे साथ आकर बैठ गई। वो उस दिन मेरा पसंदीदा काला टॉप नीली जींस पहन कर आई थी। उसके उभार देख कर अचानक मैं थोड़ा ललचा सा गया था, लेकिन मैंने ऐसा कुछ ज़ाहिर नही होने दिया। उसके साथ बहुत मज़ाक किया, वो बहुत इम्प्रेस हो गई और जाते वक्त अपना फ़ोन नम्बर मुझे दे गई, लेकिन मैंने उसे फिर भी कॉल नही किया।

मेरी गर्लफ़्रेंड

प्रेषक : राहुल

मेरा नाम अमित है और मैं दिल्ली में रहता हूँ। मेरी उमर २० साल की है और मेरा मन भी सेक्स करने को करता है। और मै जब भी लड़की या औरत को देखता हूँ मेरा मन करता है कि मैं उसी वक्त उसे चोद दूँ।

मैं बहुत दिनों से चूत की तलाश में था कि एक दिन मैं अपने इंग्लिश के ट्यूशन में क्लास ले रहा था, तभी एक नई लड़की ने हमारे ट्यूशन में दाखिला लिया और वो रोज़ हमारे ग्रुप में मेरे पास बैठने लगी और हम ऐसे ही विषय में बात किया करते थे।

एक दिन हमारी बात बढ़ी और और हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई और हम डेट पर जाने लगे। एक दिन हम होटल में खाना खा रहे थे तभी जोर की बारिश शुरू हो गई और वो बारिश मेरी जिन्दगी की सबसे हसीन बारिश बन गई। बारिश जोर से हो रही थी तभी मेरी गर्लफ्रेंड रिचा ने मुझसे कहा- हम घर कैसे जायेंगे?

पूजा की चुदाई

प्रेषक : राहुल राज

दोस्तों आज जो कहानी मैं आप लोगो को सुनाने जा रहा हूं उससे उम्मीद हैं की चुदक्कर लड़कियों के चूत की प्यास और ज्यादा बढ़ जाएगी।

मैं आज से तीन साल पहले कोलकाता में पढ़ाई कर रहा था. मेरे घर के सामने ही एक लड़की रहती थी जिसका नाम था पूजा। उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को देखकर अक्सर मेरा लण्ड पैन्ट में अकड़ने लगते था और मैं सोचता था कि कब चोदूंगा इसकी चूत?

भगवान ने मौका दे ही दिया उसकी चुदाई का !

मैं कॉलेज से आ रहा था। अँधेरा हो गया था। अचानक पीछे से किसी के बुलाने की आवाज़ आई तो मैंने मुड़ के देखा, मेरे पीछे पूजा डार्लिंग खड़ी थी।

वो मेरे पास आई और बोली कि राहुल मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ।

मेरी आत्मकथा

प्रेषक : राहुल सिंह

मेरा नाम राहुल है। मैं गोरखपुर का रहने वाला हूं। मेरा एक संयुक्त परिवार है, मेरे घर में पापा, मम्मी, चाचा, चाची रहते हैं. मेरी उम्र २७ साल है मुझे शुरू से ही सेक्स का बहुत शौक रहा है. मुझे लड़कियों में उनकी चूची बहुत पसंद है. उनसे खेलना, चूसना मेरी पहली पसंद है. सेक्स करने से पहले मुझे पार्टनर के साथ खेलने और उसे बहुत ज्यादा उत्तेजित करने में बहुत मज़ा आता है. २ साल घर से दूर हॉस्टल में पढ़ा हूं। उस वक्त मेरे बेड पे मैं और मेरा एक रूम पार्टनर सोते थे.

एक दिन जब हम सो रहे थे तब रात को मुझे लगा कि कोई मेरे लंड के साथ खेल रहा है. मैंने धीरे से एक आंख खोली तो देखा कि मेरा रूम पार्टनर मेरे लंड के साथ खेल रहा है, उससे मस्ती कर रहा है। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैं सोने का बहाना कर के बेड पे पड़ा रहा. फिर वो मेरे लंड को चूसने लगा मुझे बहुत मज़ा आने लगा. तब मैंने उठने की सोची और उठते ही अपने रूम पार्टनर पे झूठ का गुस्सा किया। वो मुझे मनाने लगा। मैंने उससे कहा कि ठीक है लेकिन बस इतने में मज़ा नही आयेगा, उसने पूछा- क्या मतलब?

मेरी सहेली-२

प्रेषिका : कामिनी सक्सेना

सहयोगी : रीता शर्मा

रीता के पति राहुल अभी तक घर नहीं आए थे। रीता ने अपना सामान रसोई में रखा और खाना बनाने की तैयारी करने लगी। उसे रह रह कर साहिल से चुदाई की याद आ रही थी। लगभग ७ बजे राहुल आया। काम भी पूरा हो चुका था.

राहुल ने आते ही पूछा - "कामिनी चली गयी क्या..."

"कामिनी की बड़ी चिंता है... कुछ गड़बड़ है क्या ?"

"नही है तो नही... पर तुम गड़बड़ करा दो न..."

"तुम्ही डरते हो.... वो तो बेचारी तुम पर मरती है..."

"फिर उसे आने दो...... इस बार तो पटा ही लूँगा उसे.."

"कामिनी तुमसे मिलकर गयी थी क्या ?"

संगम

लेखिका : नेहा वर्मा

रवि और मोहित मेरे अच्छे दोस्तों में थे। हम तीनों अक्सर शाम को झील के किनारे घूमने जाते थे. मुझे रवि ज्यादा अच्छा लगता था. उसमे सेक्स अपील ज्यादा थी. उसमें मर्दों जैसी बात थी.

पर मोहित साधारण था. ....बातें भी कम करता था.

हम तीनो हम उमर थे. मैं रवि के बदन को मन में नंगा करने की कोशिश करती थी और सोचती थी की उसका लंड कैसा होगा. जब खड़ा होता होगा तो कैसा लगता होगा. कैसी चुदाई करता होगा. कुछ दिनों से मैंने महसूस किया कि रवि भी मुझ में खास दिलचस्पी लेने लगा है। मोहित की नज़रें तो मैं पहचान ही गई थी। मोहित तो मन ही मन में शायद मुझे प्यार करता था. पर बोलता कुछ नहीं था.

जब मेरे घर वाले ५ -६ दिनों के लिए दिल्ली गए तब एक दिन मैंने कुछ सोच कर दोनों को घर पर बुलाया. मैंने सोचा की दोस्ती तो बहुत हो गयी, अब दोस्ती को भुना लेना चाहिए. रवि को जाल में फंसा लेना चाहिए. लगता था वो चक्कर में आ भी जाएगा.

लुगाई चुदवाई अपने सामने

प्रेषक : लक्ष्य भारद्वाज

हाय दोस्तो !

मैं अपने और अपनी पत्नी के बारे में बताता हूं। मेरा नाम एस गुप्ता है और मेरी पत्नी का नाम एन गुप्ता है। मैं मूलतः राजस्थान का रहने वाला हूं और अभी दिल्ली में नौकरी करता हूं। मेरी पत्नी बेहद खूबसूरत है और उसका साईज़ ३२-२८-३४ है। उसकी गाण्ड देखकर बूढ़ों का भी लण्ड उसे चोदने के लिए खड़ा हो जाए !

यह बात करीब डेढ़ साल पहले की है, कुछ शारीरिक कमी के कारण मेरे लण्ड में शिथिलता आने लगी। जिसके कारण मुझमें और मेरी पत्नी में काफ़ी अनबन रहने लगी। रोज़ काम से थक हार कर आता और पत्नी लड़ना शुरू कर देती।

मैं और मेरे विद्यार्थी-१

लेखिका : नेहा वर्मा

मैं स्कूल में बायलोजी विषय की टीचर थी. १२ वीं क्लास को पढाती थी. मेरी क्लास में लड़के और लड़कियां दोनों ही पढ़ते थे. स्कूल में साड़ी पहनना जरूरी था. मैं दूसरी टीचर्स की तरह खूब मेक-अप करती और खूबसूरत साडियाँ पहन कर स्कूल आती थी, जैसे कोई स्पर्धा चल रही हो. क्लास में मुझे रोहित बहुत ही अच्छा लगता था. वो १८ साल का एक सुंदर लड़का था, लंबा भी था, और हमेशा मुझे देख कर मुस्कुराता था, बल्कि खुश होता था. उसकी मतलबी मुस्कराहट मुझे बैचैन कर देती थी. मुझे भी कभी कभी लगता था कि रोहित मुझे अपनी बाँहों लेकर चूम ले ... रोहित ही आज की कहानी का नायक है.

हमेशा की तरह आज भी क्लास में मैं पढ़ा रही थी. मैंने विद्यार्थियों को एक सवाल का उत्तर लिखने को दिया. सवाल सरल था. सभी लिखने लगे, पर रोहित मुझे बार बार देख रहा था. उसे देख कर आज मेरा मन भी मचल गया. मैं भी मुस्कुरा कर उसे निहारने लगी. वो मुझे लगातार देखता ही जा रहा था, कभी कभी उसकी नजरें झुक भी जाती थी. मुझे लगा कि कुछ करना चाहिए. मैं घूमते हुए उसके पास गयी, उसके कंधे पर हाथ रख कर बोली,"रोहित कुछ मुश्किल है क्या ..." मैंने उसका कन्धा दबा दिया.

मैं और मेरी दोस्त की बहन

प्रेषक : मानस गुरू

मेरा नाम देव है. मेरी उम्र २३ साल की है. मैं पढ़ाई लिखाई में बचपन से ही अच्छा हूँ. गणित मेरी प्रिय विषय है. जब मैं स्नातकी में था तब मेरी दोस्त की बहन १२ कक्षा पास करने के बाद मेडिकल प्रवेशिका परीक्षा देने की तैयारी कर रही थी. मैं अपने फ़ुरसत के समय ट्यूशन भी किया करता था. मैं हाई स्कूल के बच्चों को पढाता था. हमारे इलाके में मेरा काफी नाम भी हो गया था.

उसी दौरान मेरे दोस्त ने मुझे अपने बहन को गणित का ट्यूशन देने को कहा. मैं उसे पैसे के बारे में कुछ ना बोल पाया. उसकी बहन को ट्यूशन देना चालू कर दिया. उसकी बहन का नाम कशिश था. उनके घर में वो दो भाई बहन और उनकी अम्मी रहती थी. उनके पापा गुजर चुके थे. कशिश अपनी नाम की तरह अपने में एक अजब सी कशिश समेटे हुऐ थी. वो नई नई जवानी की दुनिया में पाँव रख रही थी. उसका कमरा हर वक्त सजा संवरा और कुछ ज्यादा ही गुलाबी नजर आता था. वो बला की खूबसूरत थी। उसकी तन पे यौवन के फूल धीरे धीरे बड़े हो रहे थे. उसके गुलाबी होंठ हमेशा जैसे किसी सवेरे गुलाब की पंखुडियां सुबह की ओस में भीगी सी नजर आती थी. उसके लब के दाईं ओर एक छोटा सा तिल था जो उसकी सुन्दरता को चार चाँद लगाता था.

प्रेमिका की कुंवारी बुर

प्रेषक : सैम्यूल जेम्स

यह मेरी सच्ची कहानी है। मैं एक स्मार्ट, सेक्सी और सुन्दर लड़का हूं। वैसे तो मैंने बीस बाईस लड़कियों के साथ सेक्स किया है पर यह मेरी प्रेमिका के साथ पहली चुदाई थी।

१९९९ की बात है। मैं अपनी मौसीजी को देखने पी.जी.आई. लखनऊ गया था। वहां पर मुझे मेरी प्रेमिका से मुलाकात हुई। उसकी शादी लखनऊ में मेरी मौसी के खानदान में हुई थी। मैं और मेरे मामा सुबह ही पी.जी.आई. पहुंच गए थे। मैंने जब नीतू को देखा तो मैं बहुत खुश हुआ। वो रात भर मौसी की देखभाल करने के लिए जागी थी।

पड़ोसन की संतुष्टी

प्रेषक : फ़रज़ान पटेल

हाय मैं फरजान ३९ बड़ोदा से

यह मेरे सेक्स एक्सपेरिएंस की असली कहानी है जो मैंने अपनी पड़ोसन भाभी के साथ किया था.

३ साल पहले की बात है ये. एक दिन मैं अपना बाईक ले के ऑफिस जा रहा था, घर से थोड़ा आगे चला तो देखा कि बाजू वाली भाभी रास्ते पे चल के कहीं जा रही थी। वो दिखने में एकदम सेक्सी और उसके बूब्स तो समझो कि नारियल जैसे बड़े और सख्त। मैं कई बार सोचता था कि इस साली को एक बार चोदना चाहिए और इसके बूब्स को जोर से दबाना चाहिए।

ये सब सोच कर मैंने अपनी बाइक उसके बाजू में खड़ी कर दी। मैंने उससे पूछा- भाभी ! कहाँ जा रही हो? चलो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा मैं ऑफिस जा रहा हूँ।

विदेशी माल

प्रेषक : मो.शाहिद आलम

हाय दोस्तों मैं शाहिद एक बार फिर आपके सामने अपनी बीती बातें रखने आया हूँ। मेरी पहली कहानी " कुंवारी छोकरी " को अच्छा रेस्पोंस मिला इसके लिए आप सभी को धन्यवाद। बस इसी तरह हमारा साथ दीजिये। यह कहानी पिछले साल की है। अब मैं कहानी शुरू करता हूँ।

एक बार वार्षिक परीक्षा के बाद मैं बनारस गया। वहां मेरे मामा रहते हैं। मामा एक छोटी सी प्राइवेट कुरियर कंपनी में काम करते हैं। उनके बेटे यानी मेरा ममेरा भाई हमसे एक साल बड़ा है। उसका नाम जमाल उद्दीन है। जब यह नाम लेकर उसे कोई बुलाता है तो उसे कुछ ख़ास खुशी नहीं होती है। इसलिए वो अपना नाम जमाल ना बताकर जिमी बताता है। अब सब लोग बनारस में उसे जिमी ही बुलाते हैं। वह एक साधारण सा टूरिस्ट गाइड है। मेरा भाई दिखने में भी अच्छा है, मेरा मतलब काफी आकर्षक है। हम दोनों हर तरह की बातें कर लेते हैं।

मैंने लण्ड चूसा

प्रेषिका : गुंजन शर्मा

मेरा नाम गुंजन है और मेरी उम्र २७ साल है. मेरी शादी को दो साल हो गए हैं.

यह तब की बात है जब मैं शादी के बाद पहली बार अपनी माँ के घर गई थी. मैं अपनी सहेली सुमन से मिलने उसके घर गई तो वह बहुत खुश हुई.

हम दोनों बातें करने लगे. बातों बातों में उसने मुझसे पूछा कि दर्द हुआ था. मैं तो शरमा गई. मैंने नही सोचा था कि वो ऐसे पूछेगी. सुमन बोली कि शरमाओ नहीं ! बताओ ना !

मैं झिझक कर बोली- हाँ दर्द तो बहुत हुआ और खून भी निकला.

सुमन यह सुनकर उतेजित हो गई. कहने लगी कि क्या खून भी निकला?

मैं और मेरे विद्यार्थी-२

लेखिका : नेहा वर्मा

अगले दिन मैंने महिमा को रोहित के साथ आने को कह दिया. महिमा तुंरत तैयार हो गयी. मैं समझ गयी आग दोनों और लगी है.

रोहित उसे अपनी मोटर साइकिल पर बैठा कर ले आया.

रोहित और महिमा को मैंने पास पास ही सोफे पर बैठाया. मैं चाय बना कर ले आयी. मैंने देखा कि वो दोनों एक दूसरे की टांगों को स्पर्श करते हुए बैठे बात कर रहे थे. मैं मुस्कुरा उठी.

"महिमा ........रोहित तुम्हारी बहुत तारीफ कर रहा था ..."

रोहित ने तुंरत ही कहा -"मैम .... मैं अभी आया ...." वो उठ कर बाहर चला गया.

महिमा ने कहा - "मैम ! मुझे क्यों बुलाया है?

तुम्हें रोहित अच्छा लगता है?

.... वो मेरे से कुछ बात ही नहीं करता है ज्यादा .."

भाभी किराएदार

प्रेषक : समीर रंजन

हेलो फ्रेंड्स, मैं समीर लखनऊ वाला फिर हाज़िर हूं दूसरी कहानी लेकर

यह बात आज से १ साल पुरानी है जब हमारे मकान में एक किरायदार रहने के लिए आए थे। में उन्हें भैया और भाभी कहता था। धीरे धीरे उनसे अच्छे सम्बंध बनते गये और मैं उनके करीब पहुंचता गया।

भाभी का पति तो ज़्यादातर तौर पर बाहर ही रहता था। एक दिन यूँ हुआ कि भाभी के पति गये हुए थे और मेरे घर वाले भी आउट ऑफ मुंबई गये थे और कमरे की चाबी भाभी को दे गये, मुझे घरवालो ने फोन कर के बता दिया था की चाबी भाभी के पास है।

मैं घर पे आया और सीधा भाभी के कमरे की बेल बजाई तो भाभी निकली उस वक़्त उन्होने क्रीम रंग का गहरे गले सूट पहन रखा था और सिर पे दुपट्टा भी नही था। वैसे भाभी का फिगर ३६ ३२ ३६ होगा, ब्रा इतनी टाइट पहन रखी थी कि मुमे बाहर आने के लिए फड़फड़ा रहे थे।

पहला यौन-सम्बंध निशु संग

प्रेषक : प्रकाश रंजन

हेलो दोस्तो !

मैं अपने दोस्त नवीन के यहां घूमने गया था। उसके परिवार में वो, उसकी बहन निशु और मम्मी डैडी हैं। मेरा पहला यौन-सम्बंध निशु संग हुआ था।

रात के करीब नौ बजे खाना खाने के बाद नवीन, निशु और मैं रज़ाई औढ़े अंताक्षरी खेल रहे थे। मेरी बगल में नवीन और सामने निशु बैठी थी। आध घण्टे से मेरे पैर मुड़े होने के कारण दर्द करने लगे थे तो मैंने अपने पैर सीधे कर लिए। मुझे महसूस हुआ कि मेरा पैर किसी मुलायम चीज़ से छू रहा है।मैंने अपने पैर के अंगूठे को धीरे धीरे हिलाया तो समझ गया कि वो मुलायम चीज़ निशु की चूत है, परन्तु निशु मुझे कुछ कह नहीं रही थी, चुपचाप अन्ताक्षरी खेल रही थी। एक घण्टे बाद हम तीनों एक साथ सो गए। बीच में नवीन सोया था। मेरी आंखों से नींद गायब थी। मैं कैसे भी निशु को चोदना चाहता था।

मज़ा और मलाई

प्रेषिका/प्रेषक ?: पुष्पा सोनी/संजय ?

प्रिय दोस्तो !

मेरी पिछली कहानी "माला की चुदाई" पर बहुत से पत्र मिले। मेरे कई पाठकों ने अपने दिमाग का इस्तेमाल किया और मुझसे जानकारी मांगी कि मैं नर हूं या नारी?

तो दोस्तो- हकीकत यह है कि मैं नर हूं, मेरा नाम संजय है और राजस्थान के अजमेर ज़िले का रहने वाला हूं। आज मैं आपको नई कहानी बत रहा हूं जो करीब चार माह पुरानी है।

मैं शार्टकट के चक्कर से पुलिया पार करता हुआ बाईक से कालोनी में जाने वाला था मगर उससे पहले ही मुझे एक शानदार २६-२७ साल की नई शादीशुदा युवती नज़र आई जो अपने आप में बहुत ही खूबसूरत थी। उसके बूब्स तो माशा अल्लाह बहुत ही नज़ाकत लिए हुए थे। उसने मुझे आवाज़ लगाते हुए कहा कि क्या आप मुझे आगे कालोनी तक लिफ़्ट देंगे? मुझे तो मानो बिन मांगे मुराद मिल गई। मैंने बड़े सलीके से जवाब दिया- जी बैठिए ! मैं आपको आपके घर तक छोड़ दूंगा। वो मेरी बाईक पर बैठ गई।

अब मैं बाईक चलाता और हल्के से भी ब्रेक लगने से वो मुझसे जैसे ही स्पर्श करती, कसम से बहुत गहरा झटका लगता, क्योंकि हए झटके के साथ उसके बड़े बड़े बूब मेरी कमर से टकरा जाते और मेरी हालत खराब हो जाती। खैर जैसे तैसे मैं उसके घर पहुंच कर उसे घर के बाहर छोड़ कर जाने लगा तो उसने मुझे बड़े प्यार से अन्दर बुलाया तो मैं इंकार ना कर सका, चूंकि दोपहर का समय था और गर्मी का मौसम भी, शरीर से पसीना चू रहा था।

भाभी की चुदाई दोस्त के साथ

प्रेषक : राज

मैं आप लोगों को एक गर्म सच्ची कहानी बता रहा हूं अपने दोस्त की बीवी की चुदाई की !

मेरा एक बचपन का दोस्त है। हम दोनों एक साथ बड़े हुए और उसकी शादी हो गई। शादी के कुछ दिनों बाद वो हमेशा अपनी बीवी की चुदाई कैसे करता है, बताता रहता था। जिसे सुनकर मेरा मन भी चुदाई करने को करता था और मैं सोचता था कि वो कैसे भाभी को चोदता होगा और भाभी कैसे चुदवाती होगी।

एक दिन मैंने उसे कहा- यार ! मेर मन चुदाई के लिए करता है और मेरे पास कोई जुगाड़ भी नहीं है। उसने कुछ नहीं कहा, लेकिन अगले दिन उसने मुझे कहा कि मैं उसकी बीवी को चोदना चाहूं तो चोद सकता हूं, उसे कोई परेशानी नहीं। मैंने कहा कि भाभी क्या चुदाई के लिए मान गई

स्कूल में मस्ती-३

प्रेषक : दीपक

६ महीने बाद निधि कि कक्षा में ही एक नई लड़की ने प्रवेश लिया, उसका नाम प्रिया था। जब मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया। वो निधि से भी ज्यादा ही खूबसूरत थी। उसकी लम्बाई करीब ५'३" और रंग एकदम दूध जैसा था। उसको देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। मैं प्रिया को चोदने की तरकीब लगाने लगा।मेरे मन की मुराद जल्दी ही पूरी हो गई। प्रिया का स्कूल में लेट ऐडमिशन था और उसके पास विज्ञान विषय था, इस कारण उसे पढ़ाई में दिक्कत आ रही थी।

एक दिन वो मेरे पास आई और बोली- सर ! मेरा स्कूल में लेट ऐडमिशन है और मुझे फ़िज़िक्स में काफ़ी दिक्कत आ रही है, क्या आप मुझे ट्यूशन पढ़ा सकते हैं?

मैंने कहा- हां ! क्यों नहीं ! तुम स्कूल खत्म होने के बाद मेरे ओफ़िस में आ कर पढ़ सकती हो।

पति के सारे दोस्त और मैं अकेली

प्रेषिका : प्रतिभा शर्मा

हेल्लो दोस्तों, मैंने पिछले दिनों अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ीं तो मेरा भी मन हुआ कि मैं भी अपने अनुभव आपके साथ बाटूँ। मैं आपको अपने बारे में बताती हूँ.

मेरा नाम फाल्गुनी है. मैं ३४ साल की शादीशुदा औरत हूँ. मेरे पति बिज़नस के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं.

कुछ दिन पहले की बात है मेरे पति दो दिन के लिए घर से बाहर गए हुए थे और मैं घर में अकेली टीवी पर ब्लू फ़िल्म देख रही थी. ब्लू फ़िल्म देख देख कर मेरी चूत में से पानी आने लगा था. मेरा मन कर रहा था कि कोई मज़ेदार लंड मिल जाए तो जी भर के चुदाई करवाऊं.

वो कहते हैं ना कि सच्चे दिल से मांगो तो सब कुछ मिलता है. घर की कॉल बेल बजी तो मुझे लगा कि भगवान् ने मेरी सुन ली. मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि मेरे पति के ख़ास दोस्तों वर्मा और गुप्ता बाहर खड़े थे.
 
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